हुनर से आत्मनिर्भरता की उड़ान: देवगवां में 13 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने सीखे रोजगार के गुर**SBI RSETI का 12 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, डेयरी उत्पाद बनाने से लेकर बैंकिंग फ्रॉड से बचाव और मुद्रा ऋण तक की दी जानकारी
10 अक्टूबर 2026
श्री निवास मिश्रा
मानपुर/उमरिया। गांव की महिलाएं अब हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ेंगी। ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (SBI RSETI), उमरिया के माध्यम से ग्राम पंचायत देवगवां में आयोजित 12 दिवसीय डेयरी उत्पाद एवं जैविक खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 अक्टूबर को संपन्न हुआ। 29 सितंबर से शुरू हुए इस प्रशिक्षण में 13 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने भाग लेकर रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।
*डेयरी उत्पाद बनाने और व्यवसाय शुरू करने के सीखे तरीके*
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को दूध एवं दुग्ध उत्पादों से खाद्य पदार्थ तैयार करने, जैविक खाद्य प्रसंस्करण, उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग तथा छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। ट्रेनर जनक नंदनी द्विवेदी एवं डॉ. जगन्नाथ सोनी ने महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया।
*बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाव और मुद्रा ऋण की जानकारी*
कार्यक्रम में बैंकिंग विभाग के शाखा प्रबंधक ने महिलाओं को बैंकिंग फ्रॉड से बचने, एटीएम से सुरक्षित लेन-देन करने तथा मुद्रा ऋण योजना की जानकारी दी। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए उपलब्ध वित्तीय विकल्पों के प्रति जागरूक करना और छोटे व्यवसाय की शुरुआत के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
*तरुण कुमार सिंह के निर्देशन में हुआ आयोजन*
SBI RSETI, उमरिया के डायरेक्टर तरुण कुमार सिंह के निर्देशन में प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें सीमा सिंह सोमवंशी, पुष्पा सिंह चौहान, रश्मि सिंह, शान्ति सिंह एवं बबली सिंह सहित 13 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने सहभागिता की।
*गांव में ही रोजगार विकसित करने पर जोर*
प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर डेयरी उत्पाद एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में छोटे व्यवसाय शुरू करने की संभावनाओं से परिचित कराया गया। स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाएं सामूहिक रूप से उत्पादन और बिक्री की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। इससे परिवार की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अवसर विकसित हो सकते हैं।
*प्रशिक्षण का समापन महिलाओं के कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। अब प्रशिक्षण से प्राप्त हुनर को रोजगार में बदलने के लिए बाजार, वित्तीय सहायता और निरंतर मार्गदर्शन की उपलब्धता अहम होगी।*