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खम्हार पाकुट जलाशय बना कमाई का जरिया, मछली पालन से आदिवासी समिति को ₹7.50 लाख का शुद्ध मुनाफा75 क्विंटल मछली उत्पादन से 10.50 लाख रुपये की आय, 52 आदिवासी मछुआ सदस्यों को मिला आजीविका का सहारा

खम्हार पाकुट जलाशय बना कमाई का जरिया, मछली पालन से आदिवासी समिति को ₹7.50 लाख का शुद्ध मुनाफा75 क्विंटल मछली उत्पादन से 10.50 लाख रुपये की आय, 52 आदिवासी मछुआ सदस्यों को मिला आजीविका का सहारा



संवाददाता : संतोष कुमार चौहान / साइंस वाणी न्यूज़, लैलूंगा 

रायगढ़, 22 अक्टूबर 2026। ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित खम्हार पाकुट सिंचाई जलाशय आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। समिति ने जलाशय में मछली पालन कर 75 क्विंटल मछली का उत्पादन किया और उसके विक्रय से 10.50 लाख रुपये की आय अर्जित की। इसमें खर्चों के बाद समिति को 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि से समिति के 52 आदिवासी मछुआ सदस्यों को आर्थिक संबल मिला है।
191 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र में हो रहा मछली पालन
खम्हार पाकुट सिंचाई जलाशय में मछली पालन का कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। 191.340 हेक्टेयर औसत जलक्षेत्र वाले इस जलाशय को आदिवासी मछुआ सहकारी समिति ने 10 वर्ष के पट्टे पर लेकर मछली पालन शुरू किया है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से समिति के सदस्य सामूहिक रूप से मछली उत्पादन, मत्स्याखेट और बिक्री का कार्य कर रहे हैं।
जलाशय के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए समिति ने मछली पालन को आजीविका का साधन बनाया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही समिति की आय में भी वृद्धि हो रही है।
दो लाख मछली बीज डालकर किया 75 क्विंटल उत्पादन
जलाशय में मछली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से समिति द्वारा लगभग दो लाख मछली बीज (फिंगरलिंग) का संचयन किया गया था। बेहतर प्रबंधन और सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप समिति को 75 क्विंटल मछली का उत्पादन प्राप्त हुआ।
मछलियों की बिक्री से समिति ने कुल 10.50 लाख रुपये की आय अर्जित की। विभिन्न खर्चों के बाद 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। मछली पालन से होने वाली इस आय ने समिति के सदस्यों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रोत्साहित किया है।
प्रशिक्षण और उपकरणों से मिली मदद
मत्स्य पालन विभाग द्वारा मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत समिति के सदस्यों को मछली पालन से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके साथ ही मछली पकड़ने के लिए जाल और मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए आइस बॉक्स जैसे आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
इन सुविधाओं से मछली पकड़ने, उनके सुरक्षित रखरखाव और बाजार तक पहुंचाने में सदस्यों को मदद मिल रही है। प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता से समिति के सदस्य व्यवस्थित तरीके से मछली पालन की गतिविधियों का संचालन कर पा रहे हैं।
सामूहिक प्रयास से मजबूत हो रही आजीविका
खम्हार पाकुट आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के 52 सदस्य सामूहिक रूप से मछली पालन का कार्य कर रहे हैं। जलाशय में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर समिति ने आय अर्जित करने का एक बेहतर माध्यम विकसित किया है।
खम्हार पाकुट जलाशय में मछली पालन से प्राप्त यह उपलब्धि दर्शाती है कि स्थानीय संसाधनों का उचित प्रबंधन, विभागीय मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे क्षेत्र में मछली पालन को रोजगार और आय के एक उपयोगी विकल्प के रूप में बढ़ावा मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
साइंस वाणी न्यूज़ | लैलूंगा, जिला रायगढ़

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