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लैलूंगा के लारीपानी कन्या छात्रावास में लापरवाही का आरोप!छात्रावास की अधीक्षिका पर मनमानी के सवाल! स्कूल और हॉस्टल से कथित तौर पर नदारद, मुकडेगा तहसील से लेकर घरघोड़ा तक विचरण करने की चर्चा!

लैलूंगा के लारीपानी कन्या छात्रावास में लापरवाही का आरोप!छात्रावास की अधीक्षिका पर मनमानी के सवाल! स्कूल और हॉस्टल से कथित तौर पर नदारद, मुकडेगा तहसील से लेकर घरघोड़ा तक विचरण करने की चर्चा!



 छात्राओं की जिम्मेदारी किसके भरोसे? बिना छुट्टी गायब रहने के आरोपों पर BEO शंकर सारथी का बड़ा बयान—“छुट्टी नहीं ली है, नोटिस जारी करता हूं!”

संवाददाता - संतोष कुमार चौहान 
साइंस वाणी न्यूज़ लैलूंगा 

लैलूंगा/लारीपानी। लैलूंगा क्षेत्र के लारीपानी स्थित कन्या छात्रावास की अधीक्षिका की कथित अनुपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अधीक्षिका आए दिन छात्रावास और स्कूल से नदारद रहती हैं। इतना ही नहीं, उनके मुकडेगा तहसील कार्यालय और घरघोड़ा क्षेत्र में विचरण करने की भी चर्चा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है?

 बिना छुट्टी अनुपस्थिति का आरोप, जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल!

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, अधीक्षिका बिना विधिवत छुट्टी लिए ही छात्रावास और स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल विभागीय अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि छात्रावास की नियमित व्यवस्था और छात्राओं की देखरेख से भी जुड़ा गंभीर विषय है।

 BEO रविशंकर सारथी का बयान—जारी होगा नोटिस!

इस मामले में लैलूंगा के BEO शंकर सारथी के हवाले से बताया गया है कि अधीक्षिका ने छुट्टी नहीं ली है और इस संबंध में नोटिस जारी किया जाएगा। अब देखना होगा कि विभागीय नोटिस के बाद मामले की वास्तविकता सामने आती है या नहीं और जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

 अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल!

 क्या अधीक्षिका की अनुपस्थिति की नियमित जांच की जाती है?

 क्या संबंधित दिनों में उनकी छुट्टी स्वीकृत थी या नहीं?

 अनुपस्थिति के दौरान छात्रावास की छात्राओं की देखरेख कौन करता है?

 क्या विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करेगा?

 अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर!

लारीपानी कन्या छात्रावास से जुड़े इन आरोपों पर विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उपस्थिति रजिस्टर, अवकाश रिकॉर्ड और संबंधित दिनों की वास्तविक स्थिति की जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों से पारदर्शी जांच की अपेक्षा है।

अब सवाल सीधा है—छात्रावास की जिम्मेदारी निभाई जा रही है या व्यवस्था भगवान भरोसे है?

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