आईपीएम प्रशिक्षण में किसानों को फसल सुरक्षा की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी
*आईपीएम प्रशिक्षण में किसानों को फसल सुरक्षा की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी*
*दो दिवसीय प्रशिक्षण में 60 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल, जैविक उपायों और सुरक्षित कीटनाशक उपयोग पर दिया जोर*
सारंगढ़-बिलाईगढ़। किसानों को फसलों में कीट एवं रोगों के प्रभावी प्रबंधन और सुरक्षित कृषि पद्धतियों की जानकारी देने के उद्देश्य से 28 एवं 29 सितंबर को उप संचालक कृषि कार्यालय, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र रायपुर एवं कृषि विभाग सारंगढ़-बिलाईगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
प्रशिक्षण में करीब 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें प्रगतिशील किसान, महिला किसान, पेस्टीसाइड डीलर, किसान मित्र तथा कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ उप परियोजना संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव एवं वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. शिंगरे रिता प्रभाकरराव ने किया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को धान एवं सब्जी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) की उपयोगिता समझाई। किसानों को बताया गया कि फसल में कीट एवं रोगों की रोकथाम के लिए जैविक, यांत्रिक और सांस्कृतिक उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा रासायनिक दवाओं का उपयोग आवश्यकता के अनुसार और अनुशंसित मात्रा में ही किया जाए।
डॉ. आशीष जायसवाल ने बीजोपचार के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि इससे बीजजनित रोगों की रोकथाम, बेहतर अंकुरण और स्वस्थ पौध तैयार करने में मदद मिलती है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. कलेश कुमार पैकरा ने मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व और उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी।
सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्री वरुणेश कुमार ने धान की फसल में होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान एवं उनके प्रबंधन के उपाय बताए। वहीं डॉ. शिंगरे रिता प्रभाकरराव ने धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों तथा आईपीएम के माध्यम से उनके नियंत्रण की जानकारी दी।
श्री कन्हैया लाल मीना ने एनपीएसएस मोबाइल एप के उपयोग और कीटनाशकों के सुरक्षित प्रयोग के बारे में किसानों को बताया। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का अधिक या गलत उपयोग फसल, मिट्टी और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान बताया। अधिकारियों ने किसानों से टिकाऊ खेती अपनाने, रसायनों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्रशिक्षण में मिली जानकारी को खेती में उपयोगी बताते हुए इसे अपनाने की बात कही।
