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नल-जल योजना के निर्माण पर उठे सवाल! कहीं कॉलम की खुदाई पर संदेह, तो कहीं घर-घर पानी का इंतजारगेरुपानी के केंकराझरिया में बाउंड्री वॉल की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने जताई चिंता, बालू-मिट्टी के मिश्रण और सीमेंट की कम मात्रा के इस्तेमाल का आरोप; निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग

नल-जल योजना के निर्माण पर उठे सवाल! कहीं कॉलम की खुदाई पर संदेह, तो कहीं घर-घर पानी का इंतजारगेरुपानी के केंकराझरिया में बाउंड्री वॉल की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने जताई चिंता, बालू-मिट्टी के मिश्रण और सीमेंट की कम मात्रा के इस्तेमाल का आरोप; निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग

संवाददाता : संतोष कुमार चौहान / साइंस वाणी न्यूज़, लैलूंगा

लैलूंगा/रायगढ़। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम पंचायत गेरुपानी अंतर्गत केंकराझरिया में नल-जल योजना के निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल की गुणवत्ता, कॉलम की खुदाई और घर-घर पानी की आपूर्ति को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंताएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और योजना के वास्तविक क्रियान्वयन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है।
बाउंड्री वॉल निर्माण में गुणवत्ता को लेकर सवाल

केंकराझरिया में नल-जल योजना से संबंधित बाउंड्री वॉल के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर बालू के साथ मिट्टी मिली सामग्री का उपयोग किए जाने और सीमेंट की मात्रा कम रखे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों की चिंता है कि यदि निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया, तो इससे दीवार की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री, सीमेंट-बालू के अनुपात तथा निर्माण प्रक्रिया की जांच किया जाना आवश्यक है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कॉलम की खुदाई की गहराई की जांच जरूरी

निर्माण कार्य में कॉलम की खुदाई निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप की गई है या नहीं, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसी भी निर्माण की मजबूती के लिए नींव और कॉलम का निर्धारित डिजाइन एवं तकनीकी मानकों के अनुसार तैयार होना महत्वपूर्ण है।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों को निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कॉलम की खुदाई की गहराई, नींव तथा अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण करना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की कमी सामने आती है, तो नियमानुसार सुधार कराया जाना चाहिए, ताकि निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित हो सके।

घर-घर पानी नहीं पहुंचने से योजना के उद्देश्य पर सवाल

नल-जल योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। लेकिन केंकराझरिया में घर-घर पानी नहीं पहुंचने की समस्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। योजना के तहत कितने घरों में कनेक्शन उपलब्ध हैं, जलापूर्ति की वर्तमान स्थिति क्या है और पानी नहीं पहुंचने के पीछे क्या कारण हैं, इन सभी बिंदुओं की समीक्षा जरूरी है।

संबंधित विभाग को पाइपलाइन, घरेलू कनेक्शन, जलस्रोत, जलापूर्ति व्यवस्था और योजना के संचालन की स्थिति का परीक्षण करना चाहिए। यदि तकनीकी खराबी, अधूरा निर्माण या संचालन संबंधी समस्या सामने आती है, तो उसका शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

मामले को लेकर संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की जा रही है कि केंकराझरिया में चल रहे निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण कराया जाए। बाउंड्री वॉल में इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री, कॉलम की खुदाई और अन्य तकनीकी मानकों की जांच के साथ-साथ घर-घर जलापूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की जाए।

यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता या निर्धारित मानकों की अनदेखी प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जहां सुधार की आवश्यकता हो, वहां तकनीकी निर्देशों के अनुरूप काम पूरा कराया जाए।

सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल खड़े कर सकती है, बल्कि ग्रामीणों को मिलने वाली सुविधाओं को भी प्रभावित कर सकती है।

अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है। निष्पक्ष तकनीकी जांच और समयबद्ध सुधार से ही ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान तथा नल-जल योजना के उद्देश्य की पूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

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