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न्यायालय में मामला विचाराधीन, फिर भी बाउंड्रीवॉल निर्माण पर विवाद! किसान ने उठाए सीमांकन पर गंभीर सवालछातामुड़ा-बांजीपाली सीमा पर जमीन विवाद गहराया, शासकीय भूमि प्रभावित होने की भी जताई आशंका; संयुक्त सीमांकन और लिखित स्थगन आदेश की मांग

न्यायालय में मामला विचाराधीन, फिर भी बाउंड्रीवॉल निर्माण पर विवाद! किसान ने उठाए सीमांकन पर गंभीर सवालछातामुड़ा-बांजीपाली सीमा पर जमीन विवाद गहराया, शासकीय भूमि प्रभावित होने की भी जताई आशंका; संयुक्त सीमांकन और लिखित स्थगन आदेश की मांग



संवाददाता : संतोष कुमार चौहान / साइंस वाणी न्यूज़, रायगढ़ 

रायगढ़। न्यायालय में जमीन विवाद का मामला विचाराधीन होने के बीच बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। छातामुड़ा और बांजीपाली राजस्व हल्के की सीमा पर स्थित भूमि को लेकर फत्तेचंद पटेल (गोटिया) और कैलाश आचार्य ने सीमांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन एवं राजस्व अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विवादित भूमि पर न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले निर्माण कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि सीमांकन में कथित त्रुटियों के कारण किसान की निजी भूमि के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी शासकीय भूमि भी प्रभावित हो सकती है।
न्यायालय में मामला लंबित, निर्माण कार्य को लेकर उठे सवाल

तहसील न्यायालय परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए फत्तेचंद पटेल ने बताया कि नितेश अग्रवाल की ओर से जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के संबंध में तहसीलदार न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। इसके बाद फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य को नोटिस जारी किए गए। पटेल का दावा है कि संबंधित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और इस संबंध में विवाद न्यायालय में विचाराधीन है।
उनका आरोप है कि मामले में अंतिम निर्णय आने से पहले ही मौके पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन के स्वामित्व और सीमांकन को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा है, तो मामले का निराकरण होने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि विवादित भूमि पर निर्माण किस आधार पर किया जा रहा था। वहीं, संबंधित पक्ष का जवाब और न्यायालयीन अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सीमांकन की प्रक्रिया पर सवाल, बरसात के दौरान नापजोख का आरोप

फत्तेचंद पटेल ने पूर्व में किए गए सीमांकन पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस समय सीमांकन किया गया, उस दौरान क्षेत्र में भारी बारिश, कीचड़, झाड़ियां और गड्ढों में पानी भरा हुआ था। ऐसी परिस्थितियों में जमीन की सीमाओं का सटीक निर्धारण प्रभावित होने की आशंका है।

पटेल के अनुसार, उन्होंने मौके पर सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान आपत्ति दर्ज कराई थी और बाद में न्यायालय में भी लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर शुष्क मौसम में दोनों पक्षों की उपस्थिति में दोबारा सीमांकन कराने की मांग की थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रकरण से संबंधित दस्तावेजों की नकल प्राप्त करने में परेशानी हुई। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता, सीमांकन पंचनामा और दर्ज आपत्तियों की जांच कराने की मांग की है, ताकि प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

खसरा नंबर 155/2 को लेकर दो राजस्व हल्कों की सीमा का विवाद

कैलाश आचार्य ने बताया कि विवादित भूमि छातामुड़ा और बांजीपाली की राजस्व सीमाओं के आसपास स्थित है। उनके अनुसार, सीमांकन के दौरान खसरा नंबर 155/2 के रकबे का एक हिस्सा छातामुड़ा और दूसरा हिस्सा बांजीपाली में दर्शाए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

उन्होंने मांग की कि संबंधित खसरा नंबरों, राजस्व अभिलेखों, नक्शों और गांवों की सीमाओं का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही, खसरा नंबर 155/1/ख से संबंधित विवादित भूमि के अभिलेखों की भी जांच की जाए, जिसका मामला शिकायतकर्ताओं के अनुसार तहसील न्यायालय में लंबित है।

राजस्व सीमाओं और खसरा नंबरों की वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित अभिलेखों तथा सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं ने दोनों राजस्व हल्कों के अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में दोबारा सीमांकन कराने पर जोर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी शासकीय भूमि प्रभावित होने की आशंका

कैलाश आचार्य ने विवादित स्थल के पास स्थित खसरा नंबर 156 की भूमि को शासकीय मद में दर्ज होने का दावा करते हुए उसकी भी जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि सीमांकन संबंधी विवाद के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी इस भूमि की सीमा भी प्रभावित हो सकती है।

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि निजी भूमि और शासकीय भूमि की सीमाओं का अलग-अलग अभिलेखों के आधार पर सत्यापन किया जाए। यदि सीमांकन में किसी प्रकार की त्रुटि या अतिक्रमण पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, शासकीय भूमि पर कब्जे या उसे बाउंड्रीवॉल के भीतर शामिल किए जाने की आशंका की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इस संबंध में राजस्व विभाग के अभिलेख, स्थल निरीक्षण और आधिकारिक सीमांकन रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगे।

तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद निर्माण कार्य रुकने का दावा

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मौके पर निर्माण कार्य की जानकारी तहसीलदार को लिखित और मौखिक रूप से दिए जाने के बाद निर्माण कार्य रुकवाया गया। उन्होंने इसे तत्काल राहत बताते हुए कहा कि केवल काम रुकने से विवाद का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि भूमि की वास्तविक सीमा और स्वामित्व संबंधी स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।

फत्तेचंद पटेल ने मांग की है कि न्यायालय में प्रकरण का निराकरण होने तक निर्माण कार्य स्थगित रखने के संबंध में लिखित आदेश जारी किया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि लिखित आदेश नहीं हुआ, तो रात के समय दोबारा निर्माण शुरू किया जा सकता है।

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मौके की वर्तमान स्थिति बनाए रखने और किसी भी पक्ष द्वारा विवादित भूमि पर एकतरफा निर्माण या स्थिति में बदलाव की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

दोनों राजस्व हल्कों के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने की मांग

फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य ने जिला प्रशासन एवं वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि छातामुड़ा और बांजीपाली से संबंधित सक्षम अधिकारियों, तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों (आरआई) तथा हल्का पटवारियों की संयुक्त टीम गठित की जाए।

उनकी प्रमुख मांगें हैं—

- दोनों राजस्व हल्कों के नक्शों और अभिलेखों का आपस में मिलान किया जाए।
- विवादित खसरा नंबरों की वास्तविक स्थिति और रकबे का सत्यापन कराया जाए।
- दोनों पक्षों की उपस्थिति में पारदर्शी तरीके से संयुक्त सीमांकन किया जाए।
- खसरा नंबर 156 की कथित शासकीय भूमि की सीमा और स्थिति की जांच की जाए।
- सीमांकन पंचनामा, लिखित आपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
- न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति के अनुरूप निर्माण और यथास्थिति के संबंध में सक्षम अधिकारी लिखित आदेश जारी करें।

अब प्रशासनिक जांच और न्यायालय के निर्णय पर टिकी निगाहें

छातामुड़ा-बांजीपाली सीमा से जुड़े इस भूमि विवाद में अब निष्पक्ष सीमांकन, राजस्व अभिलेखों की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे विवाद का समाधान नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से चाहते हैं।

अब यह देखना होगा कि राजस्व विभाग शिकायतों के आधार पर क्या जांच करता है, सीमांकन संबंधी आपत्तियों का निराकरण किस प्रकार होता है और शासकीय भूमि को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। मामले में संबंधित दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने तथा राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और भूमि की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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