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ग्रामसभा के दिन पंचायत भवन बंद मिलने से फगुरम में मचा बवाल, सरपंच-सचिव पर लगे गंभीर आरोप; ग्रामीणों ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

ग्रामसभा के दिन पंचायत भवन बंद मिलने से फगुरम में मचा बवाल, सरपंच-सचिव पर लगे गंभीर आरोप; ग्रामीणों ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

 

 









फगुरम में ग्रामसभा नहीं हुई तो मचा बवाल! पंचायत भवन में ताला, सरपंच-सचिव पर गंभीर आरोप

निर्धारित 2 अक्टूबर की विशेष ग्रामसभा नहीं हुई, ग्रामीणों ने उठाए सवाल; कलेक्टर को ज्ञापन सौंप जांच और कार्रवाई की मांग

सक्ती/मालखरौदा। जनपद पंचायत मालखरौदा अंतर्गत ग्राम पंचायत फगुरम में 2 अक्टूबर को निर्धारित विशेष ग्रामसभा आयोजित नहीं होने का मामला अब गरमाता जा रहा है। ग्रामसभा में शामिल होने पहुंचे ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायत भवन में ताला मिला। इसके बाद मामले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई। ग्राम पंचायत के उपसरपंच विनोद कुमार पाण्डेय सहित पंचायत सदस्यों ने मामले की शिकायत अधिकारियों से करते हुए जांच और जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए सवाल खड़े किए हैं कि जब ग्रामसभा की तिथि निर्धारित थी और उसे लेकर आदेश जारी किया गया था, तो आखिर ग्रामसभा आयोजित क्यों नहीं की गई?

पंचायत भवन में ताला, जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी पर सवाल

शिकायत के अनुसार 2 अक्टूबर को बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं पंचायत प्रतिनिधि ग्रामसभा में शामिल होने पंचायत भवन पहुंचे थे। लेकिन पंचायत भवन में ताला लगा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर सरपंच, सचिव एवं संबंधित प्रभारी अधिकारी मौजूद नहीं थे।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा पंचायत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में निर्धारित तिथि पर ग्रामसभा नहीं होना और ग्रामीणों को उचित जानकारी नहीं मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।




आदेश जारी होने के बाद भी नहीं हुई ग्रामसभा

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 30 सितंबर की रात करीब 8 बजे जनपद पंचायत मालखरौदा के आदेश क्रमांक 5323 की प्रति प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार आदेश के आधार पर ग्रामसभा से संबंधित जानकारी पंचायत के मोबाइल/व्हाट्सऐप समूह के माध्यम से साझा कर ग्रामीणों को सूचित किया गया था।

शिकायत में यह भी बताया गया है कि पंचायत सचिव नंदकिशोर रात्रे द्वारा 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक अवकाश लिया गया था। इसके बाद ग्राम पंचायत सिपिया के सचिव शत्रुघ्न साहू को फगुरम में 2 अक्टूबर की निर्धारित ग्रामसभा संचालित कराने के लिए आदेशित किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।

इसके बावजूद ग्रामसभा नहीं होने से अब सवाल उठ रहा है कि जब वैकल्पिक सचिव की व्यवस्था की गई थी, तब भी ग्रामसभा क्यों नहीं कराई गई?




सचिव पर 13 वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ होने का आरोप

शिकायत में पंचायत सचिव नंदकिशोर रात्रे के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वे वर्ष 2012-13 से ग्राम पंचायत फगुरम में सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

शिकायत में मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी एवं निर्माण कार्यों में सरपंच के साथ मिलकर कथित वित्तीय अनियमितता एवं राशि के बंदरबांट के आरोप लगाए गए हैं।





हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पहले भी शिकायतों का दावा, कार्रवाई पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि पंचायत में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व में भी जनपद पंचायत मालखरौदा एवं उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

अब ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पूर्व में शिकायतें हुई थीं तो उनकी जांच का क्या हुआ? क्या संबंधित शिकायतों की जांच कराई गई? यदि नहीं, तो आखिर क्यों?



8 या 9 अक्टूबर को ग्रामसभा कराने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि 2 अक्टूबर को निर्धारित ग्रामसभा नहीं होने के मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।

साथ ही 7 अक्टूबर के बाद 8 या 9 अक्टूबर को ग्रामसभा आयोजित कराई जाए, ताकि ग्रामीणों के सामने पंचायत के आय-व्यय, विकास कार्यों, जनहितकारी योजनाओं और पूर्व में कराए गए निर्माण कार्यों से संबंधित जानकारी रखी जा सके।

अब प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल

फगुरम मामले ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

2 अक्टूबर की निर्धारित ग्रामसभा आखिर क्यों नहीं हुई?
पंचायत भवन में ताला क्यों लगा था?
ग्रामीणों को ग्रामसभा के संबंध में पर्याप्त सूचना क्यों नहीं मिली?
आदेश के बावजूद ग्रामसभा आयोजित क्यों नहीं कराई गई?
वैकल्पिक सचिव की व्यवस्था के बाद भी ग्रामसभा क्यों नहीं हुई?
पूर्व में की गई शिकायतों पर क्या जांच हुई?
वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?

इन सवालों के जवाब अब जनपद पंचायत मालखरौदा और जिला प्रशासन सक्ती की कार्रवाई से ही सामने आएंगे।

ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो ग्रामसभा नहीं होने से लेकर पंचायत में लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों तक की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

साइंस वाणी न्यूज़ इस मामले में प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है।

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