फगुरम क्षेत्र में गौ तस्करी के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए जेल
16 अक्टूबर 2026
संवाददाता: अशोक जायसवाल
साइंस वाणी न्यूज़ सक्ती
सक्ती। जिले के पुलिस चौकी फगुरम क्षेत्र में गौवंश की कथित अवैध तस्करी के दो मामलों में पुलिस ने झारखंड निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में गौवंश को कथित तौर पर वध के उद्देश्य से ले जाने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। प्रकरण में शामिल अन्य स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।दो अलग-अलग मामलों में दर्ज हुई थी शिकायतपुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 2 मई 2026 एवं 9 जुलाई 2026 को फगुरम चौकी क्षेत्र के गौसेवकों ने अलग-अलग वाहनों में गाय-बैलों को क्रूरतापूर्वक हाथ-पैर बांधकर बूचड़खाने ले जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, घटना में शामिल अज्ञात आरोपी वाहनों एवं गौवंश को मौके पर छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए थे।मामले में चौकी फगुरम, थाना डभरा में अपराध क्रमांक 145/2026 एवं 248/2026 के तहत छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6, 10 एवं 11 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई थी।तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना से मिली जानकारीपुलिस के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल, एसडीओपी डभरा सुमित गुप्ता एवं थाना प्रभारी डभरा निरीक्षक राजेश पटेल के निर्देशन में कार्रवाई की गई।पुलिस ने आरोपी साहिल खान (37 वर्ष), पिता सफीक खान, एवं शेख सैफ अली (29 वर्ष), पिता शेख सफीक, दोनों निवासी ग्राम बरगीडाड, थाना रायडीह, जिला गुमला, झारखंड, को गिरफ्तार किया।पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानीय व्यक्तियों की सहायता से गौवंश खरीदकर ले जाने, काटने और बेचने की बात बताई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।पुलिस के अनुसार, प्रकरण में शामिल अन्य स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी अभी शेष है। उनकी तलाश और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।इस कार्रवाई में चौकी फगुरम प्रभारी उपनिरीक्षक अनवर अली सहित पुलिस चौकी एवं थाना डभरा के अधिकारियों और कर्मचारियों का योगदान रहा।