*जांजगीर चांपा/चिटफंड कंपनी के संचालक नूरजहां बेगम एवं राजन रत्न कुजूर को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास
05 नवंबर 2026
साइंस वाणी 05 नवंबर 2026
संवाददाता मणिकांत कुर्रे
* *12.5 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज एवं कम समय में रकम दोगुनी करने का दिया था झांसा, दो निवेशकों से 23.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी*
* *माननीय विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग की अदालत का फैसला, दोनों आरोपियों पर कुल 2-2 लाख रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया।*
कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने और प्रतिमाह 12.5 प्रतिशत ब्याज देने का लालच देकर निवेशकों से लाखों रुपये जमा कराने वाली चिटफंड कंपनी के दो संचालकों को न्यायालय ने कठोर सजा सुनाई है। माननीय जयदीप गर्ग, विशेष न्यायाधीश (छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम), जांजगीर की अदालत ने आरोपी नूरजहां बेगम एवं राजन रत्न कुजूर को दोषी कीठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक -एक लाख रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है।
लोक अभियोजक श्री संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, प्रकरण में प्रार्थी डिकेश्वर प्रसाद साहू ने थाना बाराद्वार में शिकायत दर्ज कराई थी कि अक्टूबर 2023 में ग्राम लवसरा में अगरबत्ती बेचने आई नैना महंत के माध्यम से उसकी पहचान आर.आर.के. पब्लिक बाजार प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से हुई थी। कंपनी में निवेश करने पर 12.5 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज एवं कम समय में रकम दोगुनी होने का प्रलोभन दिया गया। इस झांसे में आकर प्रार्थी ने स्वयं के 12.50 लाख रुपये तथा गरीबदास महंत के 11 लाख रुपये, इस प्रकार कुल 23.50 लाख रुपये विभिन्न किस्तों में निवेश किए थे। निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली।
शिकायत के आधार पर थाना बाराद्वार में अपराध क्रमांक 296/24, धारा 420, 34 भादवि एवं छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की गई। विवेचना के पश्चात कंपनी की संचालक नूरजहां बेगम एवं सीईओ राजन रत्न कुजूर के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 साक्षियों के कथन कराए गए तथा 29 प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया।
*न्यायालय ने सुनाई दो अलग-अलग धाराओं में सजा*
माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी नूरजहां बेगम एवं राजन रत्न कुजूर को धारा 420/34 भादवि के तहत 7-7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये अर्थदण्ड तथा छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक लाख रुपये अर्थदण्ड से दंडित किया गया है। अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर क्रमशः 7-7 माह एवं 10-10 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने का आदेश भी दिया गया है।
इस प्रकार चिटफंड कंपनी के माध्यम से निवेशकों की मेहनत की कमाई हड़पने के मामले में न्यायालय द्वारा दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।