हज़ार साल पहले* *मुहम्मद गजनवी ने दो बातें सिद्ध कीं-*
*हज़ार साल पहले*
*मुहम्मद गजनवी ने दो बातें सिद्ध कीं-*
सुशील कुमार कठेरिया
राष्ट्रीय अध्यक्ष
किसान सेना रिपब्लिक पार्टी
मो 9919353301
*पहली बात कि इस देश के मंदिरों में भगवान नहीं, बेईमान बैठे हैं और दूसरा इस देश के बड़े बड़े दुर्गों में राजा नहीं, कायर रहते हैं.*
*हमें मुहम्मद गजनवी को गुरु मान लेना चाहिए था, पर आज भी हम इन बेईमानों में चमत्कार ढूंढ रहे हैं, ये हमारी आस्था नहीं बल्कि हमारा अज्ञान है.*
*1025 में मुहम्मद गजनवी ने देवसोमनाथ मंदिर को लूटा, तब इस देश में यही सब हो रहा था, जो आज हो रहा है. एक हज़ार साल बीत गए, पर हम नहीं सुधरे, आज भी यज्ञ और हवन हो रहे हैं, मन्त्र जाप हो रहे हैं, तंत्र साधना चल रही है ?*
*बताते हैं, मुहम्मद गजनवी जब गुजरात के लिए चला तो गुप्तचरों ने गुजरात के राजा को बताया कि मुहम्मद गजनवी देवसोमनाथ मंदिर को लूटने आ रहा है, तो गुजरात के राजा ने अपने राजपुरोहित और सोमनाथ के पुजारियों से सलाह की कि देवसोमनाथ मन्दिर को कैसे बचाया जाय ??*
*तो पंडितों ने कहा -*
*पूरे राज्य से घी, दूध और धन इकट्ठा करो, हम यज्ञ, हवन और महामृत्युन्जय जाप करेंगे, गजनवी यहाँ तक नहीं पहुंचेगा और रास्ते में ही अँधा हो जायेगा.* 🤔
*पर गजनवी अंधा नहीं हुआ और निकट आ गया, गुजरात की सरहदों में आ गया तो गुजरात का कायर राजा लड़ने के बजाय् रात में ही गुजरात छोड़कर भाग गया.*
*और जब गजनवी देवसोमनाथ मंदिर पहुंचा तो चंद पण्डे पुजारियों को देखकर हैरान हो गया कि देवसोमनाथ मन्दिर पहुँचने तक मेरे से कोई लड़ने नहीं आया और मैं बिना किसी अवरोध के यहाँ तक पहुँच गया.*
*पुजारियों को देखकर उसने पूछा कि ये क्या कर रहे हो ! तो लोगों ने बताया कि ये हवन, यज्ञ और मारण मन्त्र चल रहे हैं, ये आपको अन्धा करने की विधियाँ चल रही हैं, वही विधियाँ आज भी चल रही हैं, वो हवन, यज्ञ आज भी उसी रूप में जारी हैं.*
*सोमनाथ मन्दिर में अथाह धन देखकर मुहम्मद गजनवी अचम्भित हो गया कि इतना धन कैसे इकट्ठा हुआ तो लोगों ने बताया कि मूर्ती का चमत्कार हैं जो हवा में लटकी हुई है.* 🤔
*इस चमत्कार को जानने के लिये गजनवी ने मन्दिर का गुम्बद तुड़वाया तो चारों तरफ़ चुम्बक निकली जिसके हटते ही चमत्कारी मूर्ती जमीन पर आ गिरी.*
*बस यही बेईमानी और गुमराह करना चमत्कार है, जो आज भी इस देश में काम कर रहा है, बाकी दूसरा कोई भौतिक चमत्कार नहीं है.*
*जो मूर्तियाँ स्वयं स्नान नहीं कर सकतीं, कपड़ा नहीं पहन सकतीं, प्रसाद को झूठा कर रहे कुत्ते तक को नहीं भगा सकतीं और अंधेरे में जिनका दर्शन कराने के लिए दीए की रोशनी का सहारा लेना पड़ता है उन्हें भगवान मानना मूर्खता नहीं तो और क्या है ???*