भटगांव में महिला बाल विकास की सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ता को घर जाकर दी धमकी एक सुपरवाइजर, कई शिकायतें, कोई कार्रवाई नहीं!
सरसींवा (सारंगढ़–बिलाईगढ़) :- क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की भटगांव परियोजना एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। धोबनी सेक्टर में पदस्थ सुपरवाइजर सुरतिया खरे पर कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता को धमकाने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अवैध वसूली करने और शिकायतों को दबाने के आरोपों से पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है। धोबनी निवासी कांग्रेस के नवयुवक नेता रोहित ने 12 जनवरी को जिला कार्यालय में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि गरम भोजन योजना के नाम पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से प्रति केंद्र 200–200 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। शिकायत के अगले ही दिन 14 जनवरी की सुबह लगभग 7 से 8 बजे के बीच सुपरवाइजर सुरतिया खरे अपने पति के साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंचीं और कथित रूप से उसे डराने-धमकाने लगीं। पीड़ित के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम की सूचना उन्होंने उसी समय जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को दे दी थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस और कठोर कार्रवाई नजर नहीं आई है।
सुरतिया खरे के विरुद्ध हुए है कई शिकायत -
भटगांव परियोजना कार्यालय ने केवल औपचारिकता निभाते हुए सुरतिया खरे को धोबनी सेक्टर से हटाकर उसी परियोजना के सलोनीकला सेक्टर में अस्थायी रूप से भेज दिया, जिससे मामला और भड़क गया। 23 जनवरी को सलोनीकला सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने परियोजना अधिकारी भटगांव को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया कि वे सुरतिया खरे को अपने क्षेत्र में पदस्थ नहीं कराना चाहतीं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि इससे पहले जब वे भटगांव सेक्टर में पदस्थ थीं तब भी गरम भोजन योजना के नाम पर सभी कार्यकर्ताओं से 200–200 रुपये वसूले जाने की शिकायतें हुई थीं, साथ ही उनके पति द्वारा गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। इन्हीं शिकायतों के बाद उन्हें भटगगांव से हटाकर धोबनी भेजा गया था और अब धोबनी में भी शिकायत सामने आने के बाद सलोनीकला भेज दिया गया, जिसे कार्यकर्ताओं ने समस्या को दबाने की कोशिश बताया है।
विभाग के अधिकारी भी संदेह के घेरे मे -
इस पूरे मामले से यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर बार-बार शिकायतों के बावजूद सुपरवाइजर के खिलाफ केवल सेक्टर बदलने जैसी हल्की कार्रवाई क्यों की जा रही है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि सुरतिया खरे को परियोजना कार्यालय का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई से बचा जा रहा है। यदि आरोप सही हैं तो केवल एक सुपरवाइजर ही नहीं, बल्कि परियोजना स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गरम भोजन जैसी संवेदनशील योजना में यदि इस तरह अवैध वसूली और दबाव का खेल चल रहा है तो संभव है कि जिले के अन्य सेक्टरों में भी यही स्थिति हो। अब निगाहें जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई करते हैं या फिर इसे भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

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