सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मिट्टी की झोपड़ी से मेरिट की चमक तक!”510 अंकों से गरीबी को मात, लैलूँगा की बेटी हुलेश्वरी राठिया ने रचा इतिहास


संवाददाता - संतोष कुमार चौहान 
साइंस वाणी न्यूज़ लैलूंगा 

लैलूंगा/रायगढ़।
जहाँ हालात अक्सर सपनों को कुचल देते हैं, वहीं लैलूंगा की एक आदिवासी बेटी ने उन हालात को ही घुटनों पर ला दिया। गाँव बनेकेला की रहने वाली हुलेश्वरी राठिया ने 510 अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि संघर्ष ही असली ताकत है, गरीबी नहीं।

सरकारी स्कूल में पढ़ाई, सीमित संसाधन, और घर की आर्थिक तंगी—ये सब उसके रास्ते में दीवार बनकर खड़े थे। लेकिन हुलेश्वरी ने हर दीवार को तोड़ते हुए आज वो मुकाम हासिल कर लिया, जो पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गया है।
 स्वामी आत्मानंद स्कूल झगरपुर में पढ़ाई करते हुए हुलेश्वरी ने दिन-रात एक कर दिया। न कोई महंगे कोचिंग, न खास सुविधाएं—सिर्फ मेहनत, लगन और परिवार का भरोसा।
 पिता – पतिराम राम राठिया, एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिनकी मेहनत और त्याग आज रंग लाया है। माता – शिव कुमारी राठिया, जिन्होंने हर कठिनाई में बेटी का हौसला बनाए रखा।

गाँव की कच्ची गलियों से निकलकर मेरिट की ऊँचाइयों तक पहुँची हुलेश्वरी आज हर उस छात्र के लिए उम्मीद बन गई है, जो हालात के आगे झुकने की सोचता है।

 ये सिर्फ नंबर नहीं, ये संघर्ष की जीत है!
 ये सिर्फ सफलता नहीं, ये एक संदेश है—“अगर हौसले बुलंद हों, तो गरीबी भी हार मान जाती है।”

अब पूरे लैलूंगा और रायगढ़ जिले में एक ही चर्चा—
“बनेकेला की बेटी ने कर दिखाया!”

हुलेश्वरी राठिया आज नाम नहीं, एक प्रेरणा बन चुकी हैं।

टिप्पणियाँ