संघर्ष, संस्कार और मां के आशीर्वाद से चंद्रप्रकाश पटेल का अग्निवीर में चयन”
सक्ती – जिले के समीपस्थ छोटे से गांव मसनिया खुर्द के होनहार युवा चंद्रप्रकाश पटेल पिता रामचरण पटेल ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और माता-पिता के आशीर्वाद के दम पर भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती में चयनित होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि परिवार के त्याग, मां के सपनों और एक युवा के अथक संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी है।
मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे चंद्रप्रकाश बचपन से ही बड़े सपने देखा करते थे। गांव की साधारण परिस्थितियों में रहकर भी उनके इरादे हमेशा मजबूत रहे। जहां कई युवा समय को व्यर्थ की चीजों में गंवा देते हैं, वहीं चंद्रप्रकाश ने अपने लक्ष्य को ही अपनी जिंदगी बना लिया था।
उनके दादा सेवलाल पटेल और दादी राम बाई पटेल ने बचपन से ही उन्हें अच्छे संस्कार दिए। वहीं चंद्रप्रकाश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने नाना जगत राम पटेल के यहां ग्राम बरगढ़ में रहकर पूरी की। नाना के घर में रहकर उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। परिवार के बुजुर्गों का मार्गदर्शन ही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकत बना।
उनकी मां लक्ष्मी बाई पटेल हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करे। मां अक्सर बेटे से कहा करती थीं —
“बेटा, जिंदगी में ऐसा काम करना कि पूरा गांव तुम पर गर्व करे।”
मां की यही बातें चंद्रप्रकाश के दिल में बस गईं और उन्होंने ठान लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, वे अपने माता-पिता का सपना जरूर पूरा करेंगे।
चंद्रप्रकाश को क्रिकेट खेलना बेहद पसंद था। गांव के मैदान में घंटों क्रिकेट खेलने वाला यह युवा अपने अंदर देश सेवा का जुनून भी रखता था। सुबह सूरज निकलने से पहले दौड़ लगाना, दिनभर पढ़ाई करना और देर रात तक मेहनत करना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। कई बार थकान और परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन मां के सपने और पिता के संघर्ष को याद कर वे हर बार फिर मजबूती से खड़े हो जाते थे।
घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी परिवार ने कभी उनके हौसले को टूटने नहीं दिया। माता-पिता ने अपनी जरूरतों को दबाकर बेटे के सपनों को आगे बढ़ाया। चंद्रप्रकाश भी जानते थे कि उनकी सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार के संघर्ष और त्याग का परिणाम होगी।
आखिरकार वह सुनहरा दिन आया जब अग्निवीर भर्ती का परिणाम घोषित हुआ और चंद्रप्रकाश पटेल का चयन हो गया। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। मां लक्ष्मी बाई पटेल की आंखों में खुशी के आंसू थे, लेकिन चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था। जिस बेटे को उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पाला-पोसा, आज वही बेटा देश सेवा के लिए सेना की वर्दी पहनने जा रहा है।
चंद्रप्रकाश पटेल की कहानी आज गांव और क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, मेहनत सच्ची हो और परिवार का आशीर्वाद साथ हो, तो गरीबी और छोटी जगह भी सपनों के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती।
मसनिया खुर्द का यह बेटा आज उन सभी युवाओं के लिए मिसाल बन गया है, जो जिंदगी में कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि संघर्ष जितना बड़ा होता है, सफलता उतनी ही शानदार बनती है।
बी डी चौहान की खास रिपोर्ट
ब्यूरो चीफ जिला सक्ती
साइंस वाणी न्यूज
7999522679
हर छोटी बड़ी खबर के लिए तुरंत संपर्क करें