-->
साहित्य साधना से राष्ट्रीय सम्मान तक : पुटकापुरी के कवि जमुना प्रसाद चौहान को बनारस में मिला मानद डॉक्टरेट सम्मान

साहित्य साधना से राष्ट्रीय सम्मान तक : पुटकापुरी के कवि जमुना प्रसाद चौहान को बनारस में मिला मानद डॉक्टरेट सम्मान





रायगढ़/पुसौर — छत्तीसगढ़ की मिट्टी में जन्मे साहित्यकार जब अपनी लेखनी से समाज की संवेदनाओं को शब्द देते हैं, तब उनकी रचनाएं केवल कविता नहीं रहतीं, बल्कि जनमानस की आवाज बन जाती हैं। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण क्षण तब सामने आया जब ग्राम पुटकापुरी, विकासखंड पुसौर, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) के सुप्रसिद्ध साहित्यकार जमुना प्रसाद चौहान को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए काशी हिंदी विश्वविद्यालय विद्यापीठ, बनारस द्वारा मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया।


दिनांक 25 मई 2026 को वाराणसी स्थित अथर्वा हॉल में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय के कुल सचिव इंद्रजीत तिवारी के करकमलों से उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए साहित्यकार, शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। सम्मान प्राप्त करते समय सभागार तालियों की गूंज से भर उठा और छत्तीसगढ़ की माटी का मान देशभर में और ऊंचा हो गया।



जमुना प्रसाद चौहान, पिता नानकुन चौहान एवं माता उकिया चौहान के सुपुत्र हैं। साधारण ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े जमुना प्रसाद चौहान ने संघर्षों के बीच अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत की। बचपन से ही उन्हें लोक संस्कृति, सामाजिक जीवन और मानवीय संवेदनाओं से विशेष लगाव रहा। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में गांव की मिट्टी की खुशबू, रिश्तों की गर्माहट और समाज की पीड़ा सहज रूप से दिखाई देती है।

उनका पहला छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह “मया के खोंधरा” साहित्य जगत में काफी चर्चित रहा। इस काव्य संग्रह को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रकाशित एवं विमोचित किया गया, जिसने उन्हें प्रदेशभर में नई पहचान दिलाई। इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन, प्रेम, अपनापन और ग्रामीण परिवेश का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। पाठकों ने इसे बेहद सराहा और यह पुस्तक लोगों के दिलों तक पहुंचने में सफल रही।

इसके बाद उनका दूसरा हिंदी कविता संग्रह “घायल संवेदनाएं” प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में समाज की पीड़ा, टूटते रिश्ते, संघर्ष, इंसानी संवेदनाएं और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया। यह कृति साहित्य प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुई और इसी लोकप्रियता तथा साहित्यिक योगदान को देखते हुए उन्हें मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया।

साहित्यकार जमुना प्रसाद चौहान ने अपनी लेखनी के माध्यम से हमेशा समाज को जागरूक करने, मानवीय मूल्यों को बचाए रखने और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया है। उनकी कविताएं केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई और जीवन के अनुभवों का प्रतिबिंब मानी जाती हैं।

सम्मान मिलने की खबर जैसे ही रायगढ़ जिले और पुसौर क्षेत्र में पहुंची, साहित्य प्रेमियों एवं क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। अनेक साहित्यकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल जमुना प्रसाद चौहान का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की साहित्यिक संस्कृति का सम्मान है।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले जमुना प्रसाद चौहान आज युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में प्रतिभा, मेहनत और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो, तो गांव की मिट्टी से उठकर भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है।

उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article