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NH-30 किनारे नियमों को चुनौती देता एमएम टी हॉस्पिटल? सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल**फायर एनओसी, पार्किंग और हाईवे सुरक्षा व्यवस्था पर स्थानीय लोगों ने उठाए प्रश्न, प्रशासनिक जांच की मांग तेज

NH-30 किनारे नियमों को चुनौती देता एमएम टी हॉस्पिटल? सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल**फायर एनओसी, पार्किंग और हाईवे सुरक्षा व्यवस्था पर स्थानीय लोगों ने उठाए प्रश्न, प्रशासनिक जांच की मांग तेज



श्री निवास मिश्रा मैहर 
मैहर। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) पर मैहर से कटनी मार्ग के बीच संचालित एमएम टी हॉस्पिटल को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अस्पताल बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों और कुछ अनिवार्य अनुमतियों के संचालन कर रहा है, जिससे न केवल अस्पताल आने वाले मरीजों और परिजनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन करने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए भी खतरे की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों के अनुसार अस्पताल परिसर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों के वाहन अक्सर हाईवे के किनारे खड़े किए जाते हैं। इससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वहीं यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सड़क सुरक्षा के उद्देश्य से लगाए गए कुछ अवरोधकों (बैरियर) के साथ छेड़छाड़ कर अस्पताल तक सीधी आवाजाही का रास्ता बनाया गया है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

*फायर सुरक्षा को लेकर उठे सवाल*

सूत्रों और स्थानीय नागरिकों का दावा है कि अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग से संबंधित आवश्यक अनुमति (फायर एनओसी) उपलब्ध है या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल जैसी संवेदनशील संस्था में फायर सेफ्टी मानकों का पूर्ण पालन नहीं हो रहा है तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर विषय हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग, फायर ऑडिट और संबंधित विभागों की स्वीकृतियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

*हाईवे सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर चिंता*

NH-30 प्रदेश और देश के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है, जहां प्रतिदिन भारी संख्या में यात्री और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में हाईवे किनारे किसी भी बड़े संस्थान के संचालन के लिए यातायात सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य माना जाता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही सीधे हाईवे से होती है, जिससे अचानक वाहन मुड़ने या रुकने की स्थिति में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस स्थिति का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

*बाईपास का ब्लैक स्पॉट बना चिंता का विषय*

मैहर बाईपास क्षेत्र पहले से ही दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर कई बार सड़क हादसे हो चुके हैं और क्षेत्र को "ब्लैक स्पॉट" के रूप में भी चिन्हित किए जाने की मांग उठती रही है। ऐसे में यदि यातायात प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

*प्रशासन से संयुक्त जांच की मांग*

नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका, अग्निशमन विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल के सभी वैधानिक दस्तावेजों, सुरक्षा प्रबंधों, पार्किंग व्यवस्था और यातायात मानकों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

*स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें*

एमएम टी हॉस्पिटल का संयुक्त प्रशासनिक निरीक्षण कराया जाए।

फायर एनओसी एवं अन्य आवश्यक अनुमतियों की जांच की जाए।

हाईवे सुरक्षा मानकों और प्रवेश-निकास व्यवस्था का परीक्षण किया जाए।

NH-30 पर सड़क सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों का आकलन किया जाए।

मैहर बाईपास के ब्लैक स्पॉट पर विशेष सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे संचालित संस्थानों की वैधानिक समीक्षा की जाए।


*जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति*

यह उल्लेखनीय है कि अस्पताल प्रबंधन या संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता स्वतंत्र प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने हाईवे सुरक्षा, अस्पताल संचालन और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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