-->
जर्जर स्कूल भवन, कच्ची सड़क और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा गंजपुर, 10 वर्षों से विकास की राह देख रहे ग्रामीण

जर्जर स्कूल भवन, कच्ची सड़क और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा गंजपुर, 10 वर्षों से विकास की राह देख रहे ग्रामीण

संवाददाता - संतोष कुमार चौहान
साइंस वाणी न्यूज़ लैलूंगा

लैलूंगा/रायगढ़। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंजपुर एवं उसके आश्रित ग्राम बरटांगर के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद गांव में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 10 वर्षों से गांव की प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से गांव की समस्याओं के निराकरण की मांग की है। उनका कहना है कि विकास योजनाओं की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन उनके गांव तक विकास का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
जर्जर विद्यालय भवन के साये में शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
ग्राम पंचायत गंजपुर में स्थित विद्यालय परिसर की स्थिति अत्यंत दयनीय बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार जर्जर स्कूल भवन के समीप स्थित माध्यमिक शाला में कक्षा 5वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई संचालित की जा रही है। भवन काफी पुराना हो चुका है तथा उसकी दीवारों में कई स्थानों पर दरारें दिखाई देती हैं। वहीं छत भी कमजोर हो चुकी है, जिससे किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों एवं अभिभावकों का कहना है कि बच्चे प्रतिदिन भय के माहौल में पढ़ाई करने को विवश हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और भवन के कमजोर हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
विद्यालय में पर्याप्त कक्षाओं का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। सीमित संसाधनों के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
बरटांगर-गंजपुर एवं अजितगढ़-रायकेरा मार्ग आज भी कच्चा
ग्रामीणों ने बताया कि बरटांगर के भाठीजाम मोहल्ले से गंजपुर तक का मार्ग पूरी तरह कच्चा है। वहीं अजितगढ़ से रायकेरा तक की सड़क भी बदहाल स्थिति में है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
गर्मी के मौसम में सड़क पर धूल का गुबार लोगों की परेशानी बढ़ाता है, जबकि बरसात में यही सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती है। जगह-जगह गड्ढों के कारण आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं तथा छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं।
स्कूली बच्चों के लिए बना जोखिम भरा रास्ता
बरसात के मौसम में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। गांव के बच्चे प्रतिदिन इसी मार्ग से विद्यालय आते-जाते हैं। सड़क पर कीचड़ और फिसलन होने के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
अभिभावकों ने बताया कि कई बार बच्चे रास्ते में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
खराब सड़क से प्रभावित हो रही स्वास्थ्य सेवाएं
ग्रामीणों के अनुसार खराब सड़क का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ रहा है। आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
कई बार गंभीर मरीजों को खाट अथवा निजी साधनों के सहारे गांव से बाहर निकालना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाती है।
वर्षों से आवेदन, फिर भी नहीं मिला समाधान
ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि विद्यालय भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कोई कार्य दिखाई नहीं देता। लगातार उपेक्षा के कारण लोगों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मानसून की दस्तक के साथ बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
मानसून की शुरुआत के साथ ही ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि बारिश शुरू होते ही सड़क की स्थिति और खराब हो जाएगी तथा गांव का संपर्क प्रभावित हो सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का उपचार और दैनिक जीवन की गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होंगी।
ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष बरसात के मौसम में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों की मांग – कब मिलेगा विकास का अधिकार?
गंजपुर एवं बरटांगर के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल नए विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए तथा बरटांगर-गंजपुर और अजितगढ़-रायकेरा मार्ग का पक्की सड़क के रूप में निर्माण कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे पिछले एक दशक से गांव के विकास की मांग कर रहे हैं। अब एक बार फिर उन्होंने उम्मीद के साथ शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उनके गांव को बुनियादी सुविधाओं का लाभ कब मिलेगा और विकास की योजनाएं धरातल पर कब उतरेंगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांगों को प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है और जर्जर विद्यालय भवन तथा बदहाल सड़कों की समस्या का समाधान कब तक हो पाता है। फिलहाल गंजपुर और बरटांगर के ग्रामीण विकास की उम्मीद लगाए प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article