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पानी पर राजनीति या जनसेवा? पेयजल संकट के बीच नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल**सरकारी पाइप निजी हैंडपंप में लगाने के आरोप से गरमाई सियासत, नगरवासियों ने मांगा जवाब

पानी पर राजनीति या जनसेवा? पेयजल संकट के बीच नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल**सरकारी पाइप निजी हैंडपंप में लगाने के आरोप से गरमाई सियासत, नगरवासियों ने मांगा जवाब


श्री निवास मिश्रा 
रामनगर (मैहर)। भीषण गर्मी और गहराते पेयजल संकट के बीच रामनगर नगर परिषद एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है। नगर में जहां एक ओर आम नागरिक पेयजल के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद के संसाधनों के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नगरवासियों का आरोप है कि परिषद की सुविधाएं आम जनता तक पहुंचने के बजाय कथित रूप से कुछ चुनिंदा और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हाल ही में सामने आए एक मामले ने पूरे नगर में चर्चा और बहस का माहौल बना दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर परिषद के स्टोर से हैंडपंप के पाइप निकालकर परिषद के वाहन के माध्यम से वार्ड क्रमांक 07 स्थित एक राजनीतिक पदाधिकारी एवं पूर्व विधायक प्रतिनिधि के निवास तक पहुंचाए गए। इसके बाद कर्मचारियों द्वारा वहां स्थित निजी हैंडपंप में पाइप फिट किए जाने की बात कही जा रही है।

हालांकि इस मामले में नगर परिषद की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन घटना को लेकर नगर में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं।

*जनता के बीच उठ रहे कई सवाल*

घटना के बाद नगरवासियों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं।

- नगर परिषद के स्टोर से सामग्री किस प्रक्रिया के तहत जारी की गई?
- क्या संबंधित सामग्री किसी सार्वजनिक कार्य के लिए स्वीकृत थी या निजी उपयोग के लिए?
- यदि सामग्री जारी की गई तो उसका प्रशासनिक अनुमोदन किस स्तर पर हुआ?
- नगर में व्याप्त पेयजल संकट के दौरान संसाधनों की प्राथमिकता क्या तय की गई है?
- क्या सभी नागरिकों को समान रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि परिषद के पास पर्याप्त पाइप और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, तो उनका उपयोग सबसे पहले उन वार्डों में होना चाहिए जहां लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

*पानी के लिए संघर्ष कर रहे कई वार्ड*

नगर के अनेक क्षेत्रों में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई मोहल्लों में जलापूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। कुछ स्थानों पर लोग निजी स्रोतों और टैंकरों पर निर्भर हैं।

ऐसे समय में यदि सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो स्वाभाविक रूप से जनता की नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है।

*विपक्ष और नागरिकों ने मांगी जांच*

नगर के कई जागरूक नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी सामग्री का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ है तो परिषद प्रशासन को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

*प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार*

फिलहाल पूरे मामले में नगर परिषद प्रशासन, स्टोर प्रभारी अथवा संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में नगरवासियों की निगाहें प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हुई हैं कि वे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।

*पारदर्शिता ही खत्म कर सकती है विवाद*

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता के मामले में किसी भी प्रकार का पक्षपात या भेदभाव जनता के विश्वास को कमजोर करता है। इसलिए आवश्यक है कि नगर परिषद उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और वितरण की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

(नोट: समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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