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जनता का भरोसा, संघर्ष की पहचान और हक की लड़ाई का दूसरा नाम  खरसिया की आयरन लेडी यशोदा यादव

जनता का भरोसा, संघर्ष की पहचान और हक की लड़ाई का दूसरा नाम खरसिया की आयरन लेडी यशोदा यादव









खरसिया/कुनकुनी। खरसिया ब्लॉक के छोटे से गांव कुनकुनी की बेटी यशोदा यादव आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। क्षेत्रभर में लोग उन्हें सम्मान के साथ "आयरन लेडी" के नाम से जानते हैं। समाज सुधार, नशामुक्ति अभियान, महिलाओं के अधिकार और जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करने वाली यशोदा यादव आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

वर्ष 2018 में जब उन्होंने अपने गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह अभियान एक दिन पूरे क्षेत्र में मिसाल बन जाएगा। लेकिन यशोदा यादव ने हार नहीं मानी। उन्होंने महिलाओं को संगठित किया, गांव-गांव जागरूकता फैलाई और नशे के खिलाफ ऐसा जनआंदोलन खड़ा किया कि आज पूरा गांव उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

मां के संघर्षों से मिली प्रेरणा

यशोदा यादव की सफलता और संघर्ष के पीछे उनकी मां का बड़ा योगदान माना जाता है। बचपन में ही उन्होंने जीवन के कई कठिन दौर देखे। परिवार के संघर्ष और मां की मेहनत ने उन्हें मजबूत बनाया। यशोदा अक्सर भावुक होकर कहती हैं

"आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें मेरी मां के संघर्ष और संस्कारों का सबसे बड़ा योगदान है। मैं हमेशा उनकी राह पर चलूंगी और जनता की आवाज बनकर उनके साथ खड़ी रहूंगी।"

यही कारण है कि समाज सेवा उनके लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है।

जनता की आवाज बनी आयरन लेडी

जब भी क्षेत्र में किसी अन्याय, शोषण या जनहित के मुद्दे की बात होती है, सबसे पहले जिस नाम की चर्चा होती है, वह है यशोदा यादव। वेदांता कंपनी के भूमि अधिग्रहण और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर भी उन्होंने खुलकर आवाज उठाई। ग्रामीणों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष ने उन्हें आम जनता के बीच और मजबूत पहचान दिलाई।

सम्मान और प्रशंसा से बढ़ा हौसला

समाज हित में किए गए कार्यों के लिए यशोदा यादव को कई मंचों पर सम्मानित भी किया गया। लेकिन उनका कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान जनता का विश्वास और प्यार है। गांव की महिलाएं उन्हें अपनी ताकत मानती हैं, जबकि युवा उन्हें संघर्ष और नेतृत्व की मिसाल के रूप में देखते हैं।

आज हर जुबान पर एक ही नाम

नशामुक्ति से लेकर सामाजिक जागरूकता तक, महिलाओं को संगठित करने से लेकर जनहित की लड़ाई लड़ने तक, यशोदा यादव ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

एक छोटे से गांव की बेटी आज पूरे खरसिया क्षेत्र में बदलाव की पहचान बन चुकी है। लोग गर्व से कहते हैं

जहां अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी हो, वहां सबसे पहले याद आती हैं खरसिया की आयरन लेडी यशोदा यादव।

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