दुर्गापुर माइंस परियोजना पर उठे सवाल, जनसुनवाई और पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
24 जून 2026
संवाददाता - संतोष कुमार चौहान
साइंस वाणी न्यूज़ धरमजयगढ़
धरमजयगढ़। एसईसीएल की प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खदान परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों में असमंजस और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2016 से लगभग 1595 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक परियोजना की जनसुनवाई आयोजित नहीं हुई है और न ही खदान से उत्पादन शुरू होने की कोई स्पष्ट समय-सीमा सामने आई है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में हुई चर्चा के दौरान प्रभावित गांवों के लोगों ने परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापित परिवारों का पुनर्वास कहां किया जाएगा, इसकी अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका मानना है कि अधिग्रहण और खनन कार्य आगे बढ़ाने से पहले पुनर्वास स्थल को चिन्हित कर उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शाहपुर गांव की लगभग 200 एकड़ भूमि और रिहायशी बस्ती को अधिग्रहण से बाहर रखने की चर्चा चल रही है। इससे अन्य प्रभावित गांवों के लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि कोयला जमीन के नीचे है तो अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया में सभी प्रभावितों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
मुआवजे को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग गांवों में बाजार मूल्य के आधार पर कम-ज्यादा मुआवजा तय करना उचित नहीं है। प्रभावितों की मांग है कि जिस गांव का बाजार मूल्य सबसे अधिक निर्धारित है, उसी आधार पर सभी प्रभावित परिवारों को समान मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
इसके अलावा ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें केवल मुआवजा मिलेगा या फिर एसईसीएल में रोजगार का अवसर भी दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि भूमि गंवाने के बाद परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है, इसलिए रोजगार की स्पष्ट नीति घोषित की जानी चाहिए।
नौकरी और मुआवजा बना विरोध का प्रमुख मुद्दा
ग्रामीणों के अनुसार परियोजना के विरोध के पीछे कई कारण हैं। इनमें बाजार मूल्य के आधार पर असमान मुआवजा, कुछ गांवों या भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने की चर्चा, वर्तमान बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा नहीं मिलना और सबसे महत्वपूर्ण रोजगार की गारंटी नहीं होना शामिल है।
प्रभावितों का कहना है कि यदि पुनर्वास, मुआवजा और नौकरी जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो एसईसीएल को भविष्य में एक बार फिर ग्रामीणों के तीव्र विरोध और आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र के लोग जनसुनवाई और कंपनी की आधिकारिक स्थिति का इंतजार कर रहे हैं।