तिरंगे की आन, बान और शान की रक्षा करते हुए हँसते-हँसते वीरगति को प्राप्त हुए कारगिल के अमर सपूतों का भारत सदैव ऋणी रहेगा" — पूर्वसैनिक किशोर कुमार चौहान
रायगढ़। हर वर्ष 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाता है। यह दिन केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अमर वीरों के अद्वितीय साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन करने का दिन है, जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
इस अवसर पर 17 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा दे चुके पूर्व सैनिक किशोर कुमार चौहान ने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल की बर्फीली चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने केवल दुश्मन को पराजित नहीं किया, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सेना अपने देश की रक्षा के लिए किसी भी कठिनाई से पीछे नहीं हटती।
उन्होंने कहा कि 1999 में पाकिस्तान समर्थित सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल, द्रास, बटालिक और आसपास की ऊँची पहाड़ियों पर कब्ज़ा कर लिया था। इन चोटियों से वे श्रीनगर लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नज़र रख सकते थे, जिससे लद्दाख क्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया।
पूर्व सैनिक किशोर कुमार चौहान ने बताया कि यह युद्ध सामान्य मैदानों में नहीं, बल्कि 16 से 18 हजार फीट की ऊँचाई वाली बर्फीली, पथरीली और दुर्गम चोटियों पर लड़ा गया। वहाँ न पेड़ थे, न सुरक्षित रास्ते, न रहने की सुविधा। ऑक्सीजन की कमी, माइनस तापमान, तेज़ बर्फीली हवाएँ और दुश्मन की लगातार गोलाबारी—इन सबके बीच भारतीय जवान आगे बढ़ते रहे।
उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों को कई बार सीधी खड़ी चट्टानों पर रात के अंधेरे में चढ़ाई करनी पड़ी, ताकि दुश्मन को अचानक जवाब दिया जा सके। पीठ पर भारी हथियार, गोला-बारूद और राशन लेकर वे हजारों फीट ऊँचाई तक पहुँचे। ऊपर से गोलियाँ बरस रही थीं, नीचे गहरी खाइयाँ थीं, फिर भी उनके कदम नहीं रुके।
*पूर्व सैनिक किशोर कुमार चौहान*
ने कहा कि टोलोलिंग, टाइगर हिल, प्वाइंट 4875 और अन्य महत्वपूर्ण चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। कई वीर जवान लड़ते-लड़ते शहीद हो गए, लेकिन उन्होंने तिरंगे का सम्मान कभी झुकने नहीं दिया। अंततः 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने सभी महत्वपूर्ण चोटियों पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया और पूरे देश ने विजय का उत्सव मनाया।
उन्होंने भावुक होकर कहा
जो जवान तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटे, , बल्कि अमर होकर लौटे। उनके बलिदान की बदौलत आज भारत का हर नागरिक सुरक्षित जीवन जी रहा है।
*अपने 17 वर्षों के सैनिक जीवन को याद करते हुए किशोर कुमार चौहान ने* कहा कि सैनिक का जीवन त्याग, अनुशासन और कर्तव्य का जीवन होता है। एक जवान अपने परिवार से दूर रहकर, हर मौसम में, हर खतरे का सामना केवल इसलिए करता है ताकि देश का तिरंगा हमेशा गर्व से लहराता रहे।
उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे कारगिल के वीरों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। उनके अनुसार, सच्ची देशभक्ति केवल नारों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन, जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण से सिद्ध होती है।
*अंत में पूर्व सैनिक किशोर कुमार चौहान ने कहा*
कारगिल के अमर शहीदों ने अपने आज को हमारे सुरक्षित कल के लिए बलिदान कर दिया। उनका त्याग भारत की सबसे बड़ी पूँजी है। जब तक हिमालय अटल है, जब तक तिरंगा आसमान में लहराता रहेगा, तब तक कारगिल के वीरों का नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अमर रहेगा।
कारगिल के सभी अमर वीर शहीदों को शत-शत नमन।
उनकी वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति हर भारतीय के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी।
*जय हिंद! वंदे मातरम्! भारत माता की जय!*