नकटी (सम्मानपुर)
01 जुलाई 2026
नकटी ल उजार के लाज नई लागे राज के नकटा हो।
गरीब के झोपड़ी टोर फोर के देखे एसी के सपना हो।।
सुख रहिबे का महल में तै गरीब के कुरिया उजार के।
धुतकर दिए तै हमर ये किके गरीब के पेट ल मार के।।
नेकी बद्दी जानय नहीं अभी कर ले तै अधरम।
करम के भोगना तै भुगतबे तब आही तोला सरम।।
चाहे हो जाए जेल भले ये कलम आज नि रुकय।
कहां जाबो कोन ठऊर ठिकाना अंतस सबके धधकय।।
गरीब के आंसू देख काबर करेजा तोर नई कलपय।
बिलख कल्हर महतारी रोवय कोन्हा म बेटा सुसकय।।
सरापा मिलही गरीबन के जतना तपना हे ओतना तपले।
गठियाले मोर बात ल तै घुनहा खटिया म पचबे अउ किरा परके मरबे।।
शांति रहेन सिधवा बनके अब क्रांति लाना जरूरी हे।
अउ कतना अन्याय सहिबो भगाना येला जरूरी हे।।
✍️योगिता साहू
जिला धमतरी