हाथियों की दहशत के नाम पर रात होते ही बिजली गुल! चाल्हा क्षेत्र में ग्रामीण अंधेरे में, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
11 अगस्त 2026
साइंस वाणी न्यूज़ धरमजयगढ़:- धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र के चाल्हा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से रात होते ही बिजली बंद किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की ओर से रात में बिजली बंद रखने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि जंगली हाथियों से सुरक्षा के नाम पर क्या पूरे गांव को अंधेरे में छोड़ देना ही एकमात्र समाधान है?
क्या वर्तमान के कलयुग में वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाथियों की तुलना में मानव का जीवन का मूल्य कम है ??
रात में बिजली बंद होने के बाद ग्रामीणों के सामने हाथी का खतरा तो बना ही रहता है, साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं, चोरी, दुर्घटना और अन्य आपात परिस्थितियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और रात में जरूरी काम से बाहर निकलने वाले ग्रामीणों को हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों की आवाजाही के कारण बिजली बंद करना आवश्यक है, तो प्रशासन और संबंधित विभाग को वैकल्पिक एवं सुरक्षित व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी दल, सायरन/अलर्ट सिस्टम, गश्त और अन्य सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि हाथियों से भी सुरक्षा रहे और ग्रामीणों को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर भी न होना पड़े।
सबसे बड़ा सवाल—बिजली बंद करने का आदेश किसका?
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग स्पष्ट करे कि—
* रात में बिजली बंद करने का लिखित आदेश किस अधिकारी ने जारी किया है?
* बिजली कितने बजे से कितने बजे तक बंद की जा रही है और इसका आधिकारिक कारण क्या है?
* क्या बिजली बंद करने से पहले ग्रामीणों को कोई सूचना/अलर्ट व्यवस्था दी गई है?
* हाथियों से निपटने के लिए वन विभाग की ओर से क्षेत्र में रात्रि गश्त और निगरानी दल तैनात हैं या नहीं?
* क्या बिजली बंद करने के बजाय सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया गया है?
* यदि बिजली बंद करना जरूरी है तो अस्पताल, पेयजल, जरूरी सेवाओं और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ग्रामीणों ने की जांच और तत्काल समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की समस्या वास्तविक और गंभीर है, लेकिन इसका समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ इंसानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
मामले में विद्युत विभाग, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए तथा बिजली कटौती के संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
यदि बिना पर्याप्त वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था के पूरे क्षेत्र की बिजली रात में बंद की जा रही है, तो यह जनसुरक्षा का गंभीर विषय है। संबंधित उच्च अधिकारियों को मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदारी तय करने और ग्रामीणों को राहत देने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—हाथियों से सुरक्षा भी चाहिए और रात के अंधेरे से भी मुक्ति चाहिए।
संवाददाता- पुरनो यादव
साइंस वाणी न्यूज़ धरमजयगढ़/कापू