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सुरक्षित शनिवार में बच्चों ने सीखा जिंदगी बचाने का हुनर

सुरक्षित शनिवार में बच्चों ने सीखा जिंदगी बचाने का हुनर

प्राथमिक उपचार, अग्नि सुरक्षा और रेस्क्यू का कराया प्रायोगिक अभ्यास

बरौल। आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और टीमवर्क के साथ तत्काल सहायता कैसे पहुंचाई जाए, इसका व्यवहारिक प्रशिक्षण पीएमश्री सेजेस/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतरा के विद्यार्थियों को दिया गया। विद्यालय में सुरक्षित शनिवार एवं शनिवार स्काउट्स ट्रूप के तहत प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों और स्काउट्स-गाइड्स को प्राथमिक उपचार, रेस्क्यू, अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कौशलों का प्रायोगिक अभ्यास कराया गया।

कार्यक्रम प्राचार्य गोवर्धन सिंह के संरक्षण तथा रोवर लीडर बुधराम पैकरा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को दुर्घटना, आगजनी अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने और स्वयं के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार करना रहा।

प्राथमिक उपचार का अभ्यास

कार्यशाला में विद्यार्थियों को घायल अथवा बेहोश व्यक्ति को तत्काल सहायता पहुंचाने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षकों ने प्राथमिक उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। इसके बाद विद्यार्थियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में इन गतिविधियों का स्वयं अभ्यास किया।

मानव स्ट्रेचर से रेस्क्यू

प्रशिक्षण का प्रमुख आकर्षण मानव स्ट्रेचर बनाकर रेस्क्यू करने का अभ्यास रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि आपदा या दुर्घटना के दौरान यदि स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो तो समूह के सहयोग से घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। विद्यार्थियों ने टीम बनाकर इसका प्रदर्शन किया। इससे उनमें आपसी समन्वय और टीम भावना विकसित हुई।

आग से बचाव की जानकारी

अग्नि सुरक्षा सत्र में आग लगने की स्थिति में स्वयं को सुरक्षित रखने, आसपास के लोगों को सतर्क करने और उपलब्ध अग्निशमन साधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को आपदा के समय अफरा-तफरी से बचकर धैर्य और अनुशासन के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।

प्राचार्य गोवर्धन सिंह ने कहा कि सुरक्षित शनिवार विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की आपात परिस्थितियों के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्काउटिंग से सेवा, साहस, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है। कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों को “सुरक्षित रहें, सजग रहें और जरूरत पड़ने पर दूसरों की सहायता करें” का संदेश दिया गया।

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