विकास का दफ्तर खुद बदहाल सिर पर जर्जर छत, कमरों में पानी और शौचालय बेहाल! खरसिया जनपद पंचायत की बदहाली पर उठे गंभीर सवाल
दूसरी मंजिल से गिर रहा छत का प्लास्टर, कमरों में टपक रहा पानी; टूटा शौचालय भी बढ़ा परेशानी, सुरक्षा के चलते मेन गेट तक करवाना पड़ा बंद
जिस जनपद पंचायत से गांवों के विकास की योजनाएं बनती हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी और महिला कर्मी बदहाल सुविधाओं के बीच काम करने को मजबूर
खरसिया। जिस जनपद पंचायत कार्यालय से क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की योजनाएं तैयार होती हैं और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाई जाती है, उसी जनपद पंचायत खरसिया का जर्जर भवन अब बदहाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
भवन की दूसरी मंजिल की छत से प्लास्टर गिर रहा है, कमरों में बारिश का पानी टपक रहा है और शौचालय की हालत भी खराब बताई जा रही है। खासकर जहां महिला कर्मचारी कार्य करती हैं, वहां शौचालय की समुचित एवं सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुरक्षा के मद्देनजर जनपद पंचायत का मुख्य प्रवेश द्वार यानी मेन गेट तक बंद करवाना पड़ा है।
काम के दौरान अचानक गिरा छत का प्लास्टर, बाल-बाल टला हादसा
कार्यालय में काम के दौरान छत का प्लास्टर अचानक नीचे गिरने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि उस समय कोई कर्मचारी इसकी चपेट में नहीं आया।
कर्मचारियों के अनुसार दूसरी मंजिल के कई हिस्सों में छत की हालत खराब है। जगह-जगह प्लास्टर कमजोर होकर गिर रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में काम करना भी मुश्किल हो रहा है।
खराब शौचालय, महिला कर्मचारियों की सुविधा पर भी सवाल
जनपद पंचायत भवन में सिर्फ छत और दीवारों की बदहाली ही समस्या नहीं है। शौचालय की स्थिति भी चिंताजनक है।
विशेष रूप से जहां महिला कर्मचारी कार्य करती हैं, वहां शौचालय की व्यवस्था खराब होने से उनकी मूलभूत सुविधा और कार्यस्थल की गरिमा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक सरकारी कार्यालय में महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और उपयोग योग्य शौचालय की व्यवस्था होना जरूरी है। ऐसे में शौचालय की खराब स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल ध्यान देना चाहिए
एक तरफ गिरता प्लास्टर, दूसरी तरफ टपकती छत—कर्मचारी करें तो क्या करें?
कर्मचारियों के सामने समस्या दोहरी है। ऊपर से छत का प्लास्टर गिरने का खतरा और बारिश में पानी टपकने की परेशानी, वहीं दूसरी ओर कार्यालय की मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति।
इसके बावजूद अधिकारी-कर्मचारी अपनी शासकीय जिम्मेदारियों को निभाने के लिए इसी भवन में काम कर रहे हैं।
सुरक्षा के लिए मेन गेट बंद—फिर भी कार्यालय में काम जारी
भवन की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य प्रवेश द्वार को भी सुरक्षा कारणों से बंद करवाना पड़ा है।
जब किसी सरकारी कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार तक को बंद करने की आवश्यकता पड़ जाए, तो यह भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी मानी जानी चाहिए।
रोज पहुंचते हैं सरपंच, सचिव, पंचायत प्रतिनिधि और आम नागरिक
जनपद पंचायत कार्यालय में प्रतिदिन विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, पंचायत प्रतिनिधि और आम नागरिक अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में जर्जर छत, गिरता प्लास्टर, टपकता पानी और बदहाल शौचालय जैसी समस्याएं केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कार्यालय में आने वाले आम लोगों के लिए भी चिंता का विषय हैं।
विकास का केंद्र खुद बदहाली की तस्वीर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कार्यालय पर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, उसी कार्यालय की मूलभूत सुविधाएं बदहाल क्यों हैं?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा?
क्या भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा?
क्या जर्जर हिस्सों की मरम्मत होगी?
क्या महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं उपयोग योग्य शौचालय की व्यवस्था होगी?
और क्या कर्मचारियों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई स्थायी कदम उठाया जाएगा?
अब कार्रवाई जरूरी—हादसे का इंतजार नहीं
मामले में संबंधित विभाग को तत्काल तकनीकी निरीक्षण करवाकर भवन की स्थिति का आकलन करना चाहिए। जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत के साथ महिला कर्मचारियों सहित सभी कर्मचारियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जरूरत पड़ने पर कार्यालय को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
बड़ा सवाल: हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले होगी कार्रवाई?
खरसिया जनपद पंचायत का यह मामला सिर्फ जर्जर भवन का नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा, महिला कर्मचारियों की मूलभूत सुविधाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
अब निगाहें जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं कि वे इस गंभीर स्थिति को कब संज्ञान में लेते हैं।
क्योंकि गिरता प्लास्टर, टपकती छत और टूटा शौचालय किसी बड़े हादसे या गंभीर परेशानी की दस्तक से कम नहीं
।




