बिलाईगढ़ विधानसभा में 15 जगहों पर भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा मे माल्यार्पण किया*
बिलाईगढ़ विधानसभा में 15 जगहों पर भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा मे माल्यार्पण किया*
*बिलाईगढ़ मुख्यालय में ऐतिहासिक बाईक रैली,कोने-कोने मे गूंजा बाबा की संदेश*
बिलाईगढ़ विधानसभा मे संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वी जयंती के अवसर पुर्व संसदीय सचिव बिलाईगढ़ पुर्व विधायक चन्द्रदेव राय का बिलाईगढ़ विधानसभा में दौरा कार्यक्रम रहा,जिसमें बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए लगभग 15 जगहों पर आमंत्रित रहे,कई जगहों पर सहभागिता का अहम भूमिका भी निभाई। जिसके बाद सैकड़ों की संख्या में बिलाईगढ़ मुख्यालय में ऐतिहासिक बाईक रैली करके सभा संगोष्ठी का आयोजन किया और बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुचाया।उसके बाद जनपद मुख्यालय में अष्टधातु से निर्मित डॉ अंबेडकर जी का स्टैच्यू जिसे अपने सर्विस कार्यकाल मे अपने gpf फंड में मिलने वाली राशि से अपने पिता स्व.श्री राम राय जी के स्मृति में स्थापित किया गया हैं,इसके सहित विधानसभा क्षेत्र में 36 जगहों पर गाँव,नगर में भारत रत्न, सविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के प्रतिमा का अनवरण किया है,जिसे लेकर क्षेत्रवासी व सतनामी समाज खुश है,जिसको लेकर विकास पुरुष चन्द्रदेव राय गुरुजी पूर्व विधायक को लोग हमेशा याद रखेंगे, तत्पश्चात डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ तहेदिल से नमन करके बाबा का पुजा-आर्चना कर माल्यार्पण किया,
जिसमें बाबा साहब के जीवन संघर्ष, सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान तथा भारतीय संविधान निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।पुर्व ससंदीय सचिव चन्द्रदेव राय ने कहा,कि बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर ने सदियों से दलितों, शोषित, वंचित और पीड़ित समाज को संविधान के माध्यम से अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। बाबा साहब का संघर्ष केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं था,बल्कि पूरे समाज को बराबरी दिलाने का आंदोलन था,जिसे आज आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
और आज देश में संविधान की मूल भावना—समानता, न्याय और भाईचारा—सबसे ज्यादा खतरे में है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है,और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने की कोशिश हो रही है। यह स्थिति बेहद गंभीर है,और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
सामाजिक न्याय की लड़ाई आज भी अधूरी है, और जब तक दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज को उनका पूरा हक और सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके सपनों को साकार करने के लिए हम सदैव तत्पर रहेंगे।

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