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मनरेगा में मस्टररोल शून्य का खेल पेंड्रावन का मामला



 पेंड्रावन में मनरेगा मस्टररोल शून्य—मज़दूरों की मेहनत पर “प्रशासनिक लापरवाही” का प्रहार!

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के ग्राम पंचायत पेंड्रावन में मनरेगा कार्य “Renovation of Pond for Community (शनि देव मंदिर तालाब)” (खसरा क्र. 74, रकबा 3.844 हेक्टेयर, कार्य कोड 3316006030/WH/1111587084) में बड़ा खुलासा सामने आया है।

दिनांक 09 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक जारी किए गए मनरेगा मस्टररोल को भरा ही नहीं गया बल्कि शून्य (Zero) कर दिया गया, जबकि मजदूर कई दिनों तक नियमित रूप से कार्य करते रहे थे। इससे मजदूरी भुगतान में गंभीर बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।

 मजदूरों की उपस्थिति थी दर्ज—फिर भी मस्टररोल ‘Zero’ क्यों?

स्थानीय स्रोतों के अनुसार, रोजगार सहायक द्वारा मजदूरों की उपस्थिति व उनके हस्ताक्षर के साथ नियमित गणना कर मस्टररोल जनपद पंचायत बिलाईगढ़ में जमा किया गया था। इसके बावजूद मस्टररोल को फील न कर शून्य करना गंभीर संदेह खड़ा करता है।

 किन अधिकारियों पर उठ रहे सवाल?

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में—

पंचायत सचिव

तकनीकी सहायक (TA)

कार्यक्रम अधिकारी

कंप्यूटर ऑपरेटर

की लापरवाही सामने आई है। मस्टररोल फील न करना और मजदूरों की उपस्थिति को नजरअंदाज करना मनरेगा दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।

 मजदूरों को मजदूरी से वंचित होने का खतरा

मस्टररोल शून्य किए जाने से मजदूरों का भुगतान रुक सकता है। ग्रामीणों ने इसे “मज़दूरी हड़पने की साजिश” तक बताया है और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

 पीड़ितों की मांग—तत्काल जांच और दोषियों पर कार्रवाई

ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

1. मस्टररोल की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान की जाए।

2. दोषियों पर विभागीय व अनुशासनात्मक कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की जाए।

 प्रशासन मौन, ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के कई दिनों बाद भी उच्च अधिकारियों द्वारा स्पष्ट कार्रवाई सामने न आने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि मजदूरों की मेहनत को “कागजी हेराफेरी” से दबाना असहनीय है।

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