राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर रोडोपाली में भव्य आयोजन, विज्ञान जागरूकता के साथ खेलकूद व सम्मान समारोह से गूंजा गांव
संवाददाता – राजाराम चौहान
साइंस वाणी न्यूज़ तमनार, रोडोपाली
रायगढ़/तमनार
रायगढ़ जिले के विकासखंड तमनार अंतर्गत ग्राम रोडोपाली में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस बड़े ही उत्साह, जागरूकता और जनभागीदारी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विज्ञान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों, बच्चों, महिलाओं एवं जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन वैज्ञानिक चुन्नू राम बंजारे के निर्देशन में किया गया। आयोजन में विज्ञान आधारित सोच के साथ-साथ सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ शिक्षा का संदेश भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
इस अवसर पर बच्चों के लिए कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की गई, वहीं महिला एवं पुरुष वर्ग के लिए हंडी फोड़ जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में गांव के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण निर्मित हो गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उमंग साफ दिखाई दे रही थी।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम के प्रमुख नागरिकों एवं पंचायत प्रतिनिधियों को मेमेंटो देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और ग्राम विकास में सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिली।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में साइंस वाणी न्यूज़ के अतिरिक्त राज्य प्रभारी (छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा) एवं वरिष्ठ संवाददाता संतोष कुमार चौहान उपस्थित रहे। उनके साथ साइंस वाणी न्यूज़ के पत्रकार राजाराम चौहान की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि संतोष कुमार चौहान ने अपने संबोधन में विज्ञान के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि मानव जीवन में सबसे बड़ी शक्ति “मन की शक्ति” है, जिसे विभिन्न धर्मों में ईश्वर, अल्लाह, परमेश्वर या भगवान जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इन अवधारणाओं को सही रूप में समझने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि हर सिद्धांत को अंधविश्वास के आधार पर नहीं, बल्कि तर्क और प्रमाण के आधार पर परखना चाहिए। जो बात वैज्ञानिक दृष्टि से सही हो, उसी को स्वीकार करना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है। उन्होंने बच्चों और युवाओं से वैज्ञानिक सोच विकसित करने, प्रश्न पूछने और सीखने की जिज्ञासा बनाए रखने का आह्वान किया।
🔬 सी. वी. रमन और रमन प्रभाव
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस महान भारतीय वैज्ञानिक सी. वी. रमन की ऐतिहासिक खोज “रमन प्रभाव” से जुड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने 28 फरवरी 1928 को खोजा था।
रमन प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन से संबंधित एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक घटना है। जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ—जैसे ठोस, द्रव या गैस—से होकर गुजरता है, तो उसके एक छोटे हिस्से की तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति में परिवर्तन हो जाता है। यह घटना पदार्थ की आंतरिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुख्य बिंदु: • वर्ष 1930 में सी. वी. रमन को इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ
• यह अल्पप्रत्यास्थ प्रकीर्णन (Inelastic Scattering) का महत्वपूर्ण उदाहरण है
• इसमें स्टोक्स एवं एंटी-स्टोक्स शिफ्ट देखे जाते हैं
• इसका उपयोग रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी, रासायनिक विश्लेषण एवं पदार्थों की पहचान में किया जाता है
📌 विज्ञान दिवस का महत्व
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हमें यह संदेश देता है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन, सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया का आधार है। अंधविश्वास से ऊपर उठकर तर्क, प्रमाण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना ही वास्तविक विकास और प्रगति का मार्ग है।
मुख्य अतिथि संतोष कुमार चौहान ने वैज्ञानिक चुन्नू राम बंजारे के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के आयोजन विज्ञान के प्रति जागरूकता फैलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजक रमेश कुमार चौहान एवं सेत कुमार प्रजा को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर ग्राम के गणमान्य नागरिक, पंचायत प्रतिनिधि, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार होते रहने की अपेक्षा जताई।
अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों एवं प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
यह आयोजन न केवल विज्ञान के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि ग्रामीण समाज में जागरूकता, एकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।































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