छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस बजट को बड़े गर्व से संकल्प का नाम दिया है, वह दरअसल जनता की उम्मीदों पर कुठाराघात है। यह बजट किसानों, मजदूरों, युवाओं और ग्रामीण समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने के बजाय राजनीतिक दिखावे और खोखले वादों का पुलिंदा बनकर सामने आया है। खासकर भाटापारा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति देखें तो साफ लगता है कि सरकार ने जमीन की आवाज सुने बिना कागज़ पर योजनाएं गढ़ दीं।
स — संकुचित सोच, बड़ा दावा
ग्रामीण सड़कों की दुर्दशा, सिंचाई परियोजनाओं की धीमी गति और किसानों की लागत बढ़ने जैसे मुद्दों पर बजट मौन है। सरकार की सोच राज्य की जरूरतों के मुकाबले बेहद सीमित नजर आती है।
अ — असंतुलित प्राथमिकताएं
जहां गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों को मजबूत करने की जरूरत है, वहां संसाधनों का झुकाव दिखावटी योजनाओं की ओर है। यह असंतुलन आने वाले समय में और संकट पैदा करेगा।
न — निराशाजनक दिशा
युवाओं को रोजगार के नाम पर आश्वासन, किसानों को राहत के नाम पर घोषणाएं लेकिन ठोस नीति कहीं नहीं। यह बजट उम्मीदों को तोड़ने वाला है।
क — कागज़ी विकास
घोषणाओं की लंबी सूची है, पर पिछली योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन बताता है कि यह भी फाइलों में ही सीमित रह सकता है।
अ — आडंबर का प्रदर्शन
सरकार ने बजट को उपलब्धि की तरह पेश किया, जबकि जमीनी स्तर पर बदलाव का कोई ठोस खाका नजर नहीं आता। यह ज्यादा प्रचार और कम काम का उदाहरण है।
ल — लॉलीपॉप की राजनीति
तात्कालिक राहत और आकर्षक घोषणाओं के जरिए जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई है, जबकि दीर्घकालिक समाधान गायब हैं।
प — प्रगतिहीन दृष्टि
औद्योगिक निवेश, कृषि सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोई साहसिक कदम नहीं दिखता यह बजट भविष्य की तैयारी में विफल है।
भाटापारा और ग्रामीण हकीकत आज भी कई गांवों में किसान सिंचाई के लिए जूझ रहे हैं, युवा पलायन को मजबूर हैं और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में सरकार का यह बजट वास्तविक राहत देने में नाकाम साबित होता है।
- नाम SANKALP, काम विकल्पहीन।
- घोषणाओं का शोर, समाधान कहीं नहीं
- कागज़ पर विकास, जमीन पर संघर्ष।
सरकार को यह समझना होगा कि जनता अब भाषण नहीं, बदलाव चाहती है। यदि नीतियां जमीनी जरूरतों से कटकर बनेंगी, तो विश्वास का संकट गहराएगा। छत्तीसगढ़ को दिखावे का नहीं, निर्णायक नेतृत्व और जवाबदेह बजट की जरूरत है।
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