यूजीसी ( UGC) एक्ट के बहाल के समर्थन में 27 फरवरी को ST, SC और OBC महा मोर्चा द्वारा विशाल धरना प्रदर्शन ज्ञापन का आगाज़....सुभाष सिंह परते प्रदेश अध्यक्ष,युवा प्रभाग(सर्व आदिवासी समाज)
........यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम), 2026, 15 जनवरी 2026 से प्रभावी एक कड़ा कानून है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना है। यह 2012 के नियमों की जगह लेकर SC/ST/OBC छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करता है, तथा इसके तहत 'इक्विटी सेल' और 24x7 हेल्पलाइन अनिवार्य है।
वर्तमान में देश के अधिकांश राज्यों सहित छत्तीसगढ़ में भी यूजीसी के नियम को लागू करवाने के लिए राज्य की सबसे बड़ी आबादी आदिवासी समाज सहित अनुसूचित जाति वर्ग और पिछड़ा वर्ग अंतर्गत आने वाले समाज के लोगों के द्वारा आगामी दिनांक 27 फरवरी 2026 को प्रदेश स्तरीय हजारों की संख्या में विशाल धरना प्रदर्शन,रैली और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यों को अंजाम दिया जाएगा।
मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ में सर्व आदिवासी समाज संगठन सहित राज्य के दलित और ओबीसी के समस्त महा मोर्चा ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है।
इस ऐतिहासिक जन समर्थन यूजीसी नियम के लिए इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि ST,SC और ओबीसी या निर्धन छात्रों के साथ अक्सर बड़े शिक्षण संस्थानों में भेदभाव का व्यवहार देखा गया है।
यूजीसी एक्ट 2026 (इक्विटी रेगुलेशन) के प्रमुख बिंदु:
जाति-आधारित भेदभाव की रोक: यह कानून स्पष्ट रूप से जाति या समुदाय के आधार पर छात्रों, शिक्षकों या कर्मचारियों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न को प्रतिबंधित करता है।
अनिवार्य संस्थागत संरचना: सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में एक 'इक्विटी कमेटी' (Equity Committee) और 'इक्विटी सेल' (Equity Cell) का गठन अनिवार्य है, जो शिकायतें सुनेगा।
शिकायत निवारण और दंड: भेदभाव के मामलों के लिए 24x7 हेल्पलाइन/पोर्टल की व्यवस्था है। दोषी पाए जाने पर निलंबन, निष्कासन या कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है।
लागू क्षेत्र: यह केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होता है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी: नियमों के उल्लंघन के लिए संस्थान के प्रमुख सीधे जिम्मेदार होंगे।
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