*खरसिया* । शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है! आपातकालीन सेवा 112 की गाड़ी पूरी तरह कबाड़ बन चुकी है और थाना परिसर में खड़ी-खड़ी धूल खा रही है। हालात इतने खराब हैं कि पुलिस चाहकर भी समय पर मदद नहीं पहुंचा पा रही।
*थाना बना लाचार, जनता असुरक्षित*
जब इस मुद्दे पर थाना प्रभारी से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि मामले की जानकारी ऊपर तक भेज दी गई है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं — सवाल उठता है कि
*आखिर जिम्मेदार कौन* ?
गश्त ठप, मदद में देरी!
112 गाड़ी बंद होने से रात-दिन की गश्त पर ब्रेक लग गया है। आपातकाल में पुलिस की पहुंच धीमी हो गई है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
*स्टाफ की कमी ने बढ़ाई मुसीबत*
पहले से ही पुलिस बल की कमी से जूझ रहे खरसिया थाना में हालात और बिगड़ गए हैं। सीमित जवानों के भरोसे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा संभालना मुश्किल हो गया है।
*घटनाएं बढ़ीं, व्यवस्था फेल!*
इलाके में लगातार घटनाएं हो रही हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही। आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
शासन प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर
एक ओर सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे, दूसरी ओर 112 जैसी अहम सेवा ठप — यह सीधे-सीधे प्रशासन की लापरवाही को दिखाता है।
*जनता का फूटा गुस्सा*
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तुरंत 112 वाहन को दुरुस्त किया जाए, पुलिस बल बढ़ाया जाए और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
सवाल वही — कब जागेगा शासन प्रशासन? या यूं ही खतरे में रहेगी खरसिया की जनता?



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