मजदूरों की जगह करीबी लोगों के नाम पर भुगतान निकालने का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग
। जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सत्यनगर में मनरेगा योजना के तहत कराए जा रहे तालाब निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने सामूहिक शिकायत जिला कलेक्टर को सौंपते हुए पंचायत में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी राशि निकालने, अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने और मजदूरों के हक में भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर गांव में नाराजगी का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है, लेकिन सत्यनगर पंचायत में यह योजना कथित रूप से कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत में “सामुदायिक आवरापारा नवीन तालाब निर्माण कार्य” (कार्य आईडी 3305019043) स्वीकृत हुआ था, लेकिन कार्य में वास्तविक मजदूरों को रोजगार देने के बजाय करीबी और प्रभावशाली लोगों के नाम पर मजदूरी भुगतान निकाला जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई मजदूर काम मांगने पंचायत पहुंचे, लेकिन उन्हें काम नहीं दिया गया। वहीं दूसरी ओर मास्टर रोल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए, जो कार्यस्थल पर कभी पहुंचे ही नहीं। शिकायत में कहा गया है कि पंचायत के जिम्मेदार लोगों द्वारा घर बैठे फर्जी हाजिरी भरकर मजदूरी राशि आहरित की जा रही है।
मामले में पंचायत के मेट पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर अपने परिवार और परिचितों के नाम से उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। कई ऐसे नाम भी दर्ज हैं, जिनका तालाब निर्माण कार्य से कोई लेना-देना नहीं है। इससे वास्तविक मजदूरों को रोजगार और मजदूरी दोनों से वंचित होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ वार्ड पंचों के नाम से भी बिना काम किए हाजिरी लगाई गई है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि मास्टर रोल, जॉब कार्ड, उपस्थिति पंजी और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।
गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जांच नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना गांव के गरीब परिवारों के लिए रोजगार का सबसे बड़ा सहारा है, लेकिन पंचायत में कथित भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंद मजदूरों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर टिकी हुई है।
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