संवाद दाता रामकुमार प्रजापति संभाग ब्यूरो चिप
एसईसीएल भटगांव क्षेत्र में प्रस्तावित महमाया खुली खदान परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और रोजगार के मुद्दों पर विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में भूस्वामियों ने स्पष्ट कर दिया कि पूर्व की महामाया भूमिगत खदान परियोजना से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किए बिना नई परियोजना पर आगे बढ़ना स्वीकार नहीं होगा।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भैयाथान के निर्देश पर ग्राम बरौंधी और कपसरा में आयोजित बैठक में एसडीएम चांदनी कंवर, तहसीलदार शिव नारायण राठिया, पटवारी नरेंद्र बखला, जिला पंचायत सदस्य अनुज राजवाड़े सहित एसईसीएल भटगांव के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में भूस्वामी उपस्थित रहे।
बैठक में भूस्वामियों ने आरोप लगाया कि पूर्व में भूमिगत खदान परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले कई लोगों को न तो मुआवजा मिला और न ही रोजगार। तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 10 पात्र भूस्वामियों को रोजगार देने के आदेश जारी किए जाने के बावजूद आज तक उनका पालन नहीं किया गया।रोजगार नहीं मिलने पर कई प्रभावितों ने न्यायालय की शरण ली, जहां से तीन माह के भीतर समाधान का निर्देश भी दिया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
भूस्वामियों ने बैठक में यह भी सवाल उठाया कि जब एसईसीएल भटगांव न तो कलेक्टर के आदेशों का पालन करता है और न ही उच्च न्यायालय के निर्देशों का, तो भविष्य में उस पर विश्वास कैसे किया जाए। उन्होंने वर्षों से लंबित मुआवजा और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता से हल करने की मांग की।
मुआवजा निर्धारण को लेकर भी गंभीर आपत्तियां सामने आईं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2011-12 की पुरानी गाइडलाइन के आधार पर मुआवजा तय किया गया है, जबकि वर्तमान में भूमि का बाजार मूल्य कई गुना बढ़ चुका है। सिंचित भूमि को भी उचित मूल्यांकन में शामिल नहीं किया गया, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद एसडीएम चांदनी कंवर ने भूस्वामियों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए एसईसीएल अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूर्व में भूमिगत खदान के लिए अधिग्रहित भूमि के 17 प्रभावित भूस्वामियों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए। जिन भूस्वामियों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने तथा वर्तमान परियोजना में पाई गई त्रुटियों को सुधारते हुए पुनः सर्वे कर नए सिरे से मुआवजा निर्धारण करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक पुराने मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक नई परियोजना को लेकर सहमति बनना कठिन है। भूस्वामियों ने दोहराया कि न्यायपूर्ण मुआवजा और रोजगार सुनिश्चित होने तक वे अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। अब पूरे मामले में प्रशासन और एसईसीएल की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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