खरसिया ब्लॉक का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल राम झरना केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र ही नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय जनश्रुति और मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब वे माता सीता और लक्ष्मण के साथ इस स्थल पर ठहरे थे।
कहा जाता है कि उसी समय माता सीता को प्यास लगी थी। तब भगवान श्रीराम ने अपने बाण से धरती में प्रहार किया, जिससे जलधारा फूट पड़ी और माता सीता की प्यास बुझी। इसी पावन घटना के कारण इस स्थान का नाम राम झरना पड़ा। आज भी श्रद्धालु इस स्थल को उसी आस्था और श्रद्धा के साथ देखते हैं और इसे पवित्र मानते हैं।
लेकिन दुखद पहलू यह है कि इतनी पौराणिक और धार्मिक महत्ता होने के बावजूद राम झरना आज उपेक्षा का शिकार है। परिसर में स्थापित भगवान की कई मूर्तियां खंडित अवस्था में हैं। साफ-सफाई का अभाव है, हरियाली कम होती जा रही है और मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए बनी सड़क अब भी कच्ची है। स्विमिंग पूल लंबे समय से बंद पड़ा है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूटे हुए हैं। जिस स्थान पर जानवर रखे जाते थे, वह भी अब खाली पड़ा है।
श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं, यह सोचकर कि यह वही पवित्र स्थल है जहां भगवान राम ने माता सीता की प्यास बुझाई थी, लेकिन उन्हें यहां अव्यवस्था और लापरवाही ही देखने को मिल रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वन विभाग और संबंधित प्रशासन को इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल के विकास की ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यदि यहां पक्की सड़क, साफ-सफाई, हरियाली, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल व्यवस्था और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को भी नई पहचान देगा।
अब सवाल यह है कि इतनी पवित्र और ऐतिहासिक मान्यता से जुड़े राम झरना को उसकी गरिमा के अनुरूप कब संवारा जाएगा? श्रद्धालु और क्षेत्रवासी शासन-प्रशासन से ठोस पहल की अपेक्षा कर रहे हैं।








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