जल संचय–जन भागीदारी से जनजागरूकता की ओर कार्यशाला आयोजित
संवाददाता: रामकुमार प्रजापति
बरौल। जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से “जल संचय–जन भागीदारी” अभियान के तहत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिंतामणि महराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
सांसद ने अपने संबोधन में जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए वैज्ञानिक खेती और सुनियोजित जल प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्व में ग्रामीण क्षेत्र नदी, नाले, तालाब और कुओं पर निर्भर थे, लेकिन जलस्रोतों के सूखने से भूजल दोहन तेजी से बढ़ा है। लगातार बोरिंग और अंधाधुंध उपयोग के कारण भूजल स्तर गिरता जा रहा है। ऐसे में जल का सीमित उपयोग और संरक्षण दोनों अनिवार्य हैं।
उन्होंने सरपंचों से शासन की जल, मृदा संरक्षण और सिंचाई योजनाओं की जानकारी लेकर ग्रामीणों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की अपील की। कार्यक्रम में “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन” के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन पर जोर
केंद्रीय भू-जल बोर्ड, रायपुर से पहुंचे भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने “डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन योजना” के अंतर्गत जल प्रबंधन से लाभकारी खेती पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि अनियमित वर्षा और बढ़ती सिंचाई मांग के बीच डेटा आधारित वाटर प्लानिंग ही सतत कृषि का स्थायी समाधान है।
वैज्ञानिकों ने चेक डैम, परकोलेशन टैंक, फार्म पॉन्ड, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, फसल विविधीकरण तथा वर्षा जल संचयन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का वैज्ञानिक आधार पर समाधान भी प्रस्तुत किया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी
कलेक्टर एस. जयवर्धन ने पंचायत स्तर तक जल संरक्षण की जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय से बेहतर सेवा वितरण संभव है।
वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर ने साइबर अपराध, नशामुक्ति और सड़क सुरक्षा के विषय में जागरूक किया। ग्रामीणों से साइबर ठगी से सतर्क रहने और दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनने की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” का सामूहिक संकल्प दिलाया गया। कृषि, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, वन, विद्युत, महिला एवं बाल विकास, उद्यान, आदिवासी विकास एवं मनरेगा विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी योजनाओं की जानकारी साझा की।
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजवाड़े, जनपद अध्यक्ष श्रीमती स्वाति संत सिंह, जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
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