माँ अगली बार तू बेटी, मैं तेरी माँ बन जाऊँ,
तू उठे बेफिकर असमय, मैं तेरा बिस्तर लगाऊँ।
सुबह तेरी टिफिन बना, रात में तेरा बैग सजाऊँ,
तू दर्द की दवा माँगे, मैं तेरा वैद्य बन जाऊँ।
माँ अगली बार तू बेटी, मैं तेरी माँ बन जाऊँ।
तू जिद पकड़ के बैठे, मैं तुझे प्यार से मनाऊँ,
हजारों ख्वाहिशें हों तेरी, मैं हर कदम साथ निभाऊँ।
तेरी हर अधूरी चाहत को, मैं जी-जान से सजाऊँ,
तुझे दुनिया की हर खुशी, मैं पलकों पे बिठाऊँ।
मिले वक्त तुझे भी थोड़ा, खुद को सँवारने का,
सखियों संग बेहिसाब, वो बचपन गुजारने का।
तू आए जब थक कर घर, मैं ममता की छाँव बिछाऊँ,
"कुछ खाया क्या तूने?"—कहकर पकवान बनाऊँ।
तेरी हर थकान को माँ, मैं अपनी गोद में सुलाऊँ,
तू जो रूठे मुझसे , मैं हँसकर तुझे मनाऊँ।
हर फर्ज जो तूने निभाया, वो कर्ज मैं चुकाऊँ,
माँ अगली बार तू बेटी, मैं तेरी माँ बन जाऊँ।
माँ अगली बार तू बेटी, मैं तेरी माँ बन जाऊँ।
उर्वशी नायक
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