संवाद दाता रामकुमार प्रजापति संभाग ब्यूरो चिप
बरौल /— कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन एवं जनभागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में “जिला पुरातत्त्वीय संघों के निर्माण एवं कार्यविधियाँ” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
07 से 09 मार्च तक आयोजित इस कार्यशाला में सूरजपुर जिले के जिला पुरातत्व संघ के शासकीय सदस्य डॉ. मोहन साहू ने भाग लिया। कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों को जिला पुरातत्त्वीय संघों के गठन, उनके कार्य एवं दायित्व तथा पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण में उनकी भूमिका की जानकारी दी गई।
तकनीकी सत्र में संग्रहालय प्रबंधन एवं विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। “संग्रहालयों के संचालन में जिला पुरातत्त्वीय संघों की भूमिका” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रो. आर.एन. विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व, इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय ने दिया। इसके साथ ही सेवानिवृत्त अधिकारी राहुल कुमार सिंह सहित संबंधित अधिकारियों द्वारा भी मार्गदर्शन दिया गया।
परिचर्चा सत्र में विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में संघ के माध्यम से हो रहे कार्यों और चुनौतियों की जानकारी साझा की, जिस पर विशेषज्ञों ने समाधान बताए। कार्यशाला के माध्यम से जिला स्तर पर पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने और जनसहभागिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पी.सी. पारख, प्रभात कुमार सिंह परिहार, डॉ. वृषोत्तम साहू, प्रवीन तिर्की, डॉ. राजीव मिंज एवं डॉ. विनोद कुमार पांडे (मनेंद्रगढ़) ने भी पुरातात्विक संघों से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। साथ ही बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा पूर्व में बनाए गए नियम व उपबंध वर्तमान में छत्तीसगढ़ में प्रचलित हैं।
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