माता उन्मुखीकरण के साथ गर्मी से बचाव पर विशेष अभियान, बच्चों की सुरक्षा को लेकर माताओं को किया जागरूक
पीएम श्री सेजेस बतरा विद्यालय में आयोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ‘स्मार्ट मदर’ पहल पर जोर
संवाद दाता रामकुमार प्रजापति
(बरौल )
पीएम श्री सेजेस बतरा विद्यालय में शनिवार को माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम के साथ भीषण गर्मी से बचाव को लेकर विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में माताओं की उपस्थिति रही। उन्होंने बच्चों के समग्र विकास, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को गंभीरता से सुना और समझा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माताओं को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना था, ताकि वे बच्चों के प्रथम शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका को और प्रभावी ढंग से निभा सकें। इस अवसर पर संकुल प्राचार्य श्रीमती के. मिनी प्रसन्ना संरक्षण, प्राचार्य श्री गोवर्धन सिंह, स्वप्रेरित शिक्षिका श्रीमती फातिमा सोगरा, श्रीमती सरोज किंडो, प्रधान पाठक अंजना जायसवाल, श्रीमती पार्वती राजवाड़े, श्रीमती सुनीता देवी एवं श्रीमती कार्मेला किस्पोट्टा ने माताओं को संबोधित किया।
गर्मी और लू से बचाव के उपाय बताए
विशेषज्ञों ने वर्तमान में बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों पर लू का असर तेजी से होता है, इसलिए दोपहर के समय उन्हें घर से बाहर न भेजें। बच्चों को हल्के, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनाना चाहिए, जिससे शरीर का तापमान संतुलित बना रहे। साथ ही नियमित अंतराल पर पानी पिलाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर पानी में ग्लूकोज मिलाकर देने की भी सलाह दी गई।
माताओं को यह भी बताया गया कि बच्चों को तेज धूप में खेलने से रोकें और स्कूल आते-जाते समय उनके सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर रखें। यदि किसी बच्चे में लू लगने के लक्षण जैसे चक्कर आना, तेज बुखार या कमजोरी दिखाई दे, तो तुरंत प्राथमिक उपचार के रूप में ठंडे पानी में भीगा कपड़ा सिर पर रखें और शरीर को ठंडा करने का प्रयास करें।
घरेलू उपायों पर भी दिया जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम का पना, नारियल पानी और ओआरएस घोल को गर्मी में बच्चों के लिए लाभकारी बताया। गंभीर स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।
घर पर शिक्षा को दिया बढ़ावा
कार्यक्रम में माताओं को घर के माहौल में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के तरीके बताए गए। ‘घर ही पहला स्कूल’ की अवधारणा को मजबूत करते हुए बच्चों में प्रारंभिक सीखने की आदत विकसित करने पर जोर दिया गया।
स्कूल रेडीनेस पर चर्चा
माताओं को बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही स्कूल में प्रवेश से पहले बच्चों को तैयार करने (स्कूल रेडीनेस) के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
स्मार्ट मदर’ पहल को सराहना
कार्यक्रम के दौरान सक्रिय और जागरूक माताओं को ‘स्मार्ट मदर’ के रूप में पहचान देने और सम्मानित करने की पहल की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य माताओं को बच्चों की शिक्षा और देखभाल में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
हर घर तक पहुंचेगा संदेश
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को निर्देशित किया गया कि वे सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपनी कॉपी में लिखकर अभिभावकों से हस्ताक्षर करवाएं, ताकि यह संदेश हर घर तक पहुंच सके।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिससे बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा सके। यह पहल बच्चों के सुरक्षित और समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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