श्री निवास मिश्रा
सतना। मानव सेवा और समाज कल्याण की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए ग्राम बरही, जिला कटनी की निवासी शांतिदेवी जायसवाल का देहदान मेडिकल कॉलेज सतना में किया गया। उनके इस महान निर्णय को समाज में सराहना मिल रही है और इसे एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
शांतिदेवी जायसवाल के निधन के उपरांत उनके परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज सतना को सौंप दिया, ताकि मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राएं इससे अध्ययन कर मानव सेवा के क्षेत्र में और दक्ष बन सकें।
मेडिकल कॉलेज सतना पहुंचने पर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान कॉलेज प्रशासन, डॉक्टरों एवं मेडिकल छात्रों द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। पूरे वातावरण में भावुकता और सम्मान का अद्भुत संगम देखने को मिला।
परिजनों ने बताया कि शांतिदेवी जायसवाल जीवनभर समाज सेवा के कार्यों से जुड़ी रहीं और उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके, इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं। उनके इसी संकल्प को साकार करते हुए परिवार ने देहदान का यह निर्णय लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिससे भविष्य के डॉक्टरों को मानव शरीर की संरचना को समझने में सहायता मिलती है। इस प्रकार के दान से न केवल शिक्षा को मजबूती मिलती है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करता है।
स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी शांतिदेवी जायसवाल के इस महान कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि यदि अधिक लोग इस दिशा में आगे आएं, तो चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं।
शांतिदेवी जायसवाल का यह देहदान न केवल एक श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश भी है कि जीवन के बाद भी मानवता की सेवा संभव
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