नहर बचाओ, किसान बचाओ! भगोडीही में रेलवे ठेकेदार की मनमानी और सिंचाई विभाग की चुप्पी पर गरजा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि शिखा रविंद्र गवेल
खरसिया/भगोडीही
खरसिया के भगोडीही क्षेत्र में बन रहे रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अब किसानों के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है। रेलवे ठेकेदार द्वारा सिंचाई विभाग की नहर के बीचों-बीच सीमेंट-कंक्रीट के स्थायी ढांचे, इलेक्ट्रिक बॉक्स और दीवारें खड़ी कर दी गई हैं, जिससे किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली नहर पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
इस गंभीर मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि शिखा रविंद्र गवेल ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ठेकेदार और सिंचाई विभाग पर किसानों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों के साथ बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
शिखा रविंद्र गवेल ने कहा कि यही नहर सैकड़ों किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का एकमात्र साधन है। लेकिन रेलवे ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर नहर के भीतर ही स्थायी निर्माण कर रहा है। आने वाले बारिश और खेती सीजन में यदि नहर बाधित हुई तो खेत सूख जाएंगे और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई बार शिकायत और जानकारी देने के बावजूद अधिकारी मौके पर पहुंचना तक जरूरी नहीं समझ रहे हैं। विभाग की यह चुप्पी अब संदेह पैदा कर रही है कि आखिर ठेकेदार को इतनी खुली छूट किसके संरक्षण में दी जा रही है
शिखा रविंद्र गवेल ने सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से नहर के बीच सीमेंट-कंक्रीट का निर्माण किया जा रहा है? क्या सिंचाई विभाग ने इसकी मंजूरी दी है? अगर नहीं, तो यह खुली मनमानी क्यों चल रही है?
मामला सिर्फ नहर तक सीमित नहीं है। निर्माण कार्य के दौरान नहर किनारे लगे कई कीमती और दुर्लभ पेड़-पौधों को भी काटे जाने का आरोप है। उन्होंने पूछा कि पेड़ों की कटाई की अनुमति किस विभाग ने दी? कटे हुए पेड़ वन विभाग के डिपो में जमा हुए या नहीं? यदि नहीं, तो आखिर लकड़ी कहां गई?
शिखा रविंद्र गवेल ने साफ शब्दों में कहा कि किसानों की खेती और पानी पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द नहर को खाली कराकर उसकी मरम्मत नहीं कराई गई और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों के साथ सड़क से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने दो टूक कहा —
“सिंचाई नहर किसानों की जीवनरेखा है। इसे बर्बाद करने वालों को जवाब देना ही होगा। अगर अधिकारी अब भी नहीं जागे, तो जनता उन्हें जगाना जानती है।”
अब पूरे भगोडीही और खरसिया क्षेत्र में एक ही सवाल गूंज रहा है —
आखिर सिंचाई विभाग कब जागेगा? और रेलवे ठेकेदार की मनमानी पर कार्रवाई कब होगी?









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