संवाददाता – संतोष कुमार चौहान
खरसिया | साईन्स वाणी न्यूज़
रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र के ग्राम परासकोल निवासी रमेश लाल चौहान की पुलिस पूछताछ के बाद हुई मौत के मामले में उपजा जनाक्रोश फिलहाल शांत हो गया है। गुरुवार को तहसील कार्यालय के बाहर सैकड़ों ग्रामीणों और चौहान समाज के लोगों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम किया। कई घंटों तक चले तनावपूर्ण माहौल के बाद प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई लंबी चर्चा के पश्चात कुछ महत्वपूर्ण शर्तों पर सहमति बन गई, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि रमेश लाल चौहान की रायपुर में उपचार के दौरान मौत हुई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में “इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज” का उल्लेख सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस पूछताछ के दौरान हुई मारपीट के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई।
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बंद कमरे में चर्चा
स्थिति को गंभीर होते देख प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ तहसील कार्यालय में बंद कमरे में लंबी बैठक की। इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे। चर्चा के दौरान पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तथा उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
इन शर्तों पर बनी सहमति
बैठक के बाद आंदोलनकारियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया—
▪ आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा आगे उचित मुआवजे के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी।
▪ अनुकंपा नियुक्ति: मृतक के परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी या वैकल्पिक रोजगार दिलाने की मांग शासन तक भेजने का आश्वासन दिया गया।
▪ निष्पक्ष जांच: प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यदि पुलिस प्रताड़ना की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
▪ बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा: मृतक के बच्चों की पढ़ाई तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने सकारात्मक आश्वासन दिया।
फिलहाल शांत हुआ माहौल
सहमति बनने के बाद चक्काजाम समाप्त कर दिया गया और तहसील कार्यालय के बाहर एकत्रित भीड़ भी धीरे-धीरे वापस लौट गई। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन उनकी नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी चोट या पुलिसिया प्रताड़ना की पुष्टि होती है, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
कानूनी प्रक्रिया पर नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, कस्टोडियल डेथ जैसे मामलों में पहले मजिस्ट्रियल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है। फिलहाल बिना किसी एफआईआर के मामला शांत होना प्रशासन के लिए राहत की बात मानी जा रही है, लेकिन अंतिम स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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