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रायगढ़ विश्व प्रसिद्ध सिंघनपुर गुफा में मौत बनकर टूटा मधुमक्खियों का कहर पुरातत्व विभाग की टीम पर जानलेवा हमला, 5 अधिकारी गंभीर हालत में रायगढ़ जिंदल हॉस्पिटल रेफर









रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध और रहस्यमयी सिंघनपुर गुफा एक बार फिर सनसनीखेज हादसे की वजह बन गईं। हजारों साल पुराने शैल चित्रों और गुफा संरक्षण कार्य का निरीक्षण करने पहुंची जानकारी के अनुसार पुरातत्व विभाग की टीम और वैज्ञानिक बताए जा रहे हैं  अचानक हजारों आक्रामक मधुमक्खियों ने हमला बोल दिया। कुछ ही पलों में शांत पहाड़ी इलाका चीख-पुकार, भगदड़ और अफरा-तफरी में बदल गया।





प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार इस भयावह हमले में तीन महिला अधिकारी और दो पुरुष अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। मधुमक्खियों ने पांचों अधिकारियों को इतनी बुरी तरह डंक मारे कि वे मौके पर


। जान बचाने के लिए अधिकारी पहाड़ी रास्तों और जंगलों की ओर भागते रहे, लेकिन दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।




स्थानीय ग्रामीणों और थाना भूपदेवपुर पुलिस विभाग रेस्क्यू टीम की मदद से घंटों मशक्कत के बाद घायलों को पहाड़ से नीचे उतारा गया। स्थिति बेहद गंभीर होने के कारण सभी अधिकारियों को तत्काल रायगढ़ स्थित जिंदल अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सूत्रों का कहना है कि पांचों अधिकारियों की हालत नाजुक बनी हुई है।

फिर दहशत में आया सिंघनपुर, “मौत की गुफा” का बढ़ता खौफ

सिंघनपुर गुफा पहले भी कई रहस्यमयी और खतरनाक घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गुफा क्षेत्र में वर्षों से विशाल और अत्यंत आक्रामक मधुमक्खियों का डेरा बना हुआ है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर आज तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल कागजों में सुरक्षा व्यवस्था दिखाता है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद खतरनाक है। न हीं गुफा तक जाने के लिए रास्ता ठीक से नहीं है और ना ही कोई व्यवस्था उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा, चेतावनी और बचाव व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो आने वाले समय में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।


प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल


विश्व धरोहर जैसी पहचान रखने वाली इन ऐतिहासिक गुफाओं में लगातार हो रहे हादसों ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न तो पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, न मेडिकल सुविधा उपलब्ध है और न ही आपातकालीन बचाव दल की स्थायी व्यवस्था दिखाई देती है।

आज हुए इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिंघनपुर की गुफाएं केवल पर्यटन और इतिहास का केंद्र नहीं, बल्कि जरा सी चूक पर जानलेवा साबित होने वाला खतरनाक इलाका बन चुकी हैं।

“जहां इतिहास सांस लेता है… वहीं मंडरा रहा है मौत का साया — सिंघनपुर में फिर गूंजीं दर्दनाक चीखें!”

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