वैशाख पूर्णिमा आई, धरती पर उजियारा छाया
लुंबिनी में जन्म लिया, बोधगया में ज्ञान पाया
कपिलवस्तु के राजकुमार ने, राज-पाट ठुकराया
दुख से मुक्ति का मार्ग, जग को दिखलाया
पेड़ के नीचे बैठे बुद्ध, मौन में सत्य खोजे
काम, क्रोध, मोह, लोभ के, बंधन सारे तोड़े
कहा - "अप्प दीपो भव", अपना दीपक खुद बनो
अंधविश्वास के भ्रम से, बाहर निकलो, सत्य चुनो
न मंत्र से मुक्ति मिले, न पूजा से कल्याण
कर्म ही धर्म है, यही है सच्चा ज्ञान
मध्यम मार्ग अपनाओ, अति से सदा बचो
करुणा, मैत्री, समता का, दीपक मन में रखो
नफरत को प्रेम से जीतो, क्रोध को क्षमा से मारो
लालच को दान से काटो, झूठ को सच से टारो
यही बुद्ध का संदेश है, यही है धम्म का सार
मन शुद्ध हो, वचन शुद्ध हो, कर्म हो उपकार
आज बुद्ध पूर्णिमा पर, प्रण एक हम करें
पाखंड और अंधकार से, समाज को हम भरें
विज्ञान का दीप जलाकर, अज्ञान मिटाएँगे
बुद्ध के विचारों से, नया भारत बनाएँगे
*बुद्धं शरणं गच्छामि | धम्मं शरणं गच्छामि | संघं शरणं गच्छामि*
*भवतु सब्ब मंगलं* 🙏
*क्रांतिकारी पार्वती साहू
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