जनम वैशाख पून्नि,
कपिलवस्तु लुम्बिनी,
तथागत बुद्ध हुए,
शांति बुद्ध मार्ग है।
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राजपाठ छोड़ चले,
ज्ञान खोज में निकले,
गया में बोधित्व हुए,
मिले ज्ञान मार्ग है।
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जग में नित दुख है,
दुख से ही तो सुख है,
होता निवारण यहाँ,
दया धर्म मार्ग है।
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तृष्णाओं में फंसे सब,
छूटकारा मिले कब,
निजात पाने के लिए,
ये अष्टांग मार्ग है।
(बुद्ध पूर्णिमा की🌷
शुभकामनाएँ 🔯)
साहित्य समाज कृषि सेवा
©®
कुमार🙏🏼कारनिक
"कुमार"
(छत्तीसगढ़, भारत)
९९२६४६९४०५
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