नौ जनवरी 1831 को, महाराष्ट्र के सतारा जिले,नायगांव में जन्म लिया
अज्ञान के अंधेरे में, शिक्षा का दीप जलाया
ज्योतिबा का साथ मिला, तो क्रांति की मशाल बनी
भारत की पहली शिक्षिका, सावित्री महान बनी
1848 में पुणे में, पहला बालिका विद्यालय खोला
रूढ़ियों के पहरेदारों ने, कीचड़-पत्थर फेंका, बोला
पर माता हटी नहीं, डटी रही चट्टान सी
साड़ी की थैली में, दूसरी साड़ी रख चलती थी शान से
कहा लोगों ने "पाप है, लड़की को पढ़ाना"
माता ने उत्तर दिया "अज्ञान मिटाना ही धर्म निभाना"
विधवा का मुंडन रुकवाया, बाल विवाह पर चोट किया
सत्यशोधक समाज संग, पाखंड का नाश किया
प्लेग में सेवा करते-करते, खुद को न्योछावर किया
1897 में जग छोड़ा, पर ज्ञान का प्रकाश दिया
जिस बेटी को कोख में मारते, उसको कलम थमाई
जिस नारी को दासी समझा, उसको देवी बनाई
आज जो बेटी स्कूल जाती, डॉक्टर-इंजीनियर बनती है
संसद में भाषण देती, हवाई जहाज उड़ाती है
वो सब माता सावित्री की, तपस्या का परिणाम है
शिक्षा बिना नारी अधूरी, ये उनका पैगाम है
*शिक्षा लो, तर्क करो, अन्याय से लड़ो*
*माता सावित्री फुले का सपना, हम सबको पूरा करना है*
*जय ज्योति | जय क्रांति | जय सावित्री माता* 🙏
*क्रांतिकारी पार्वती साहू*
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